महाशिवरात्रि : निशीथ काल में पूजन फलदायी


मंगलवार की रात 12.27 से 1.17 तक निशीथ काल का विशेष महत्व
भगवान शंकर की आराधना का पर्व, मंदिरों को सजाया जाने लगा
सूरत। हिन्दू धर्म शाी मेंं भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के महीने मेंं भगवान शंकर की विधिवत पूजा की जाती है। एक महीने तक श्रद्घालु भक्ति भाव से पूजन-अर्चन करते हैं। महाशिव रात्रि को भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। महाशिव रात्रि आने में गिने दिन ही शेष रह गए हैं। महाशिव रात्रि को ध्यान में रखकर शिव मंदिरोंं मेंं साफ-सफाई, रंगाई आदि की जा रही है। महाशिव रात्रि पर महाआरती, घी के शिव का दर्शन, भंडारा सहित धार्मिक कार्यक्रमोंं का आयोजन मंगलवार, 17 फरवरी को होगा। शिव मंदिरोंं मेंं मंगलवार को निशीथ काल में भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है। शाों के अनुसार महाशिव रात्रि को भगवान शिव का जन्म और विवाह दोनोंं बताया जाता है। निशीथ काल में की गयी पूजा को फलदायी बताया गया है इस साल मंगलवार को निशीथ काल का समय रात 12.27 से 1.17 बजे तक है। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेश दशोरा ने बताया कि मंगलवार को महाशिव रात्रि है। मकर का चंद्र होने से शिवरात्रि मेंं ग्रहों के अनुसार शनि का वर्चस्व रहेगा। यदि शनि की नौती चलती हो तो अथवा कुंडली मेंं शनि का अरिष्टï योग तो महाशिव रात्रि पर शांति के लिए पूजा की जा सकती है। डॉ. महेशभाई दशोरा ने बताया कि निशीथ काल की पूजा के साथ ही चार पहर की पूजा का भी विशेष महत्व है। जिसमें पहले पहर 4.38 बजे, दूसरे पहर रात 9.45 बजे तीसरे पहर की पूजा 12.53 बजे एवं चौथे पहर की पूजा दूसरे दिन 4 बजे होगी। धर्म शाोंं मेंं शिव उपासकोंं के लिए चार प्रकार की पूजा का उल्लेख किया गया है। जिसमेंं भगवान शिव की पूजा, रूद्र मंत्रोंं का जाप, शिव मंदिर में दर्शन एवं काशी मेंं मृत्यु। मंदिर अथवा घर पर ही महाशिव रात्रि पर भगवान शिवजी का पूजन किया जा सकता है।