क्या आप जानते हैं अश्विन वाले कल के ‘रन आऊट’ को ‘मांकडेड’ क्यों कहते हैं?


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आईपीएल टी-टवेन्टी क्रिकेट लीग में सोमवार को किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान आर अश्विन द्वारा प्रतिद्वंदी टीम राजस्थान रोयल्स के बल्लेबाज जोस बटलर को रन आऊट किया गया। रन आऊट करने का तरीका था तो क्रिकेट के नियमों के अनुसार, लेकिन थोड़ा विचित्र होने के कारण हमेशा से विवादों में रहा है। रन आऊट के इस तरीके को ‘मांकडेड’ कहते हैं, जिसमें गेंदबाज जब गेंद डालने के लिये भागना शुरू करता है और अंपायर के बगल से स्टंप्स तक पहुंचकर असल में गेंद डालने के बजाय वहीं रूक जाता है और नोन-स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े बल्लेबाज को तब रन आऊट कर देता है जब वह क्रिज के बाहर हो। अश्विन ने सोमवार को इसी प्रकार बटलर को आऊट किया।

 

रन आऊट के इस तरीको को लेकर बातें तो कई प्रकार की बनाई जा रही हैं। लेकिन हम यहां आपको यह बताना चाहते हैं कि आखिर रन आऊट के इस तरीके को ‘मांकडेड’ क्यों कहते हैं।

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दरअसल बात भारत की आजादी के काल की है। १९४७ में भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। सिडनी टेस्ट में भारतीय गेंदबाज विनू मांकड ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बिन ब्राऊन को इसी प्रकार रन आऊट किया था। मांकड भी गेंदबाजी के लिये भागे और फिर स्टंप के पास खड़े हो गये और बल्लेबाज के क्रिज के बाहर जाने का इंतजार करने लगे। जब वह क्रिज के बाहर चले गये तो मांकड ने उन्हें रन आऊट कर दिया। हालांकि आऊट करने से पहले उन्होंने एक दफा बल्लेेबाज को चेतावनी भी दी थी। उस वक्त ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने वीनू मांकड की काफी आलोचना की थी। तभी से इस प्रकार रन आऊट करने के तरीक को वीनू मांकड के नाम पर ‘मांकडेड’ कहा जाने लगा।

भूतकाल में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब गेंदबाज द्वारा इस प्रकार बल्लेबाज को रन आऊट कर दिये जाने के बाद भी क्षेत्ररक्षण कर रही टीम के कप्तान ने बल्लेबाज को वापस खेलने बुला लिया हो। 1987 के विश्वकप फायनल में आखिरी ओवर में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में वेस्ट इंडिज के तेज गेंदबाज वॉल्श ने बल्लेबाज वसीम जाफर को क्रिज के बाहर चले जाने के बावजूद रन आऊट नहीं किया था। अलबत्ता वॉल्श के इस जज्बे की काफी तारीफ हुई लेकिन उसी आखिरी ओवर की बाद की गेंद पर अब्बुल कादिर ने २ रन बनाकर विश्व कप जीत लिया था। इसी प्रकार एक मैच में भारतीय कप्तान विरेन्द्र सहवाग ने भी गेंदबाज द्वारा इसी प्रकार रन आऊट कराने पर अपील वापस लेते हुए बल्लेबाज को खेलने का मौका दिया था।

नीचे वीडियो देखिये। इसमें गेंदबाज ने पहले बल्लेबाज को चेताया। लेकिन जब बल्लेबाज फिर भी क्रिज के बाहर जाने से बाज नहीं आया तो दूसरी बार उसे मांकडेड रन आऊट कर दिया।

 

क्या आर अश्विन को भी ऐसा करना चाहिये था? बहस इसी को लेकर हो रही है।