विश्वकप- प्रबल दावेदार के तौर पर उभरे ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड


मेलबोर्न । विश्वकप क्रिकेट खिताब पर इसबार मेजबान देश ऑस्ट्रेलिया की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। मौजूदा विश्व कप २०१५ में अब तक सभी टीमों ने कम से कम दो मैच खेल लिए हैं। और क्वार्टर फाइनल की हल्की-हल्की तस्वीर उभरनी शुरू हो गई है। क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में ही टीमों की ताकत का असली अंदाजा लगेगा। अब तक के आंकलन के मुताबिक इस बार घरेलू टीमों के पास विश्व कप जीतने का ५०-५० फीसदी मौका है। कई कोणों से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच फाइनल खेले जाने की संभावना बन रही है, तो दक्षिण अप्रâीका भी फाइनल में पहुंच सकता है हालांकि इसकी संभावना सहमेजबान न्यूजीलैंड के फाइनल में पहुंचने के मुकाबले कम है। न्यूजीलैंड अब तक ६ बार विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचा है और इसबार उसे घरेलू मैदान का भी लाभ मिलेगा , जबकि दक्षिण अप्रâीका सिर्पâ तीन बार ऐसा कर पाया है। फाइनल मुकाबला मेलबर्न में खेला जाना है, इसलिए घरेलू मैदान पर खेलने का लाभ ऑस्ट्रेलिया को मिलेगा। अगर ऑस्ट्रेलिया इस बार विश्व कप जीतने में सफल् रहता है, तो यह उसकी पांचवीं खिताबी जीत होगी।
वंâगारुओं के मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उनकी दावेदारी अन्य टीमों पर भारी पड़ती है हालांकि क्रिकेट आंकड़ों का खेल है और आंकड़ों के दम पर लोग आसानी से यह अनुमान लगा सकते हैं कि कौन सी टीम बेहतर हालातों में है। उसके खिलाड़ियों का प्रदर्शन वैâसा है और उनके जीतने की संभावना कितनी है। इस बार जिस फॉर्मेट में टूर्नामेंट में खेला जा रहा है। वह इस प्रतिस्पर्धा को सबसे कठिन बनाता है। सुपर ६ और सुपर ८ का फॉर्मेट विश्व कप के लिए अपनाया जाता रहा है। इसमें पहले राउंड रोबिन आधार पर मैच खेले जाते हैं और फिर नॉकआउट दौर आता है। इसके बाद सेमीफाइनल के मुकाबले खेले जाते हैं। सुपर ६ और सुपर ८ का अपना प्लस प्वाइंट होता है, जो दर्शकों के बीच उत्साह और रोमांच पैदा करता है हालांकि इस तरह के फॉर्मेट में उलटपेâर भी बहुत होते हैं। इसीr वजह से आईसीसी ने टूर्नामेंट के प्रारुप में बदलाव किया और यह तय किया कि क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल मुकाबलों में टीमों की असली परीक्षा हो सके।