ये ग्रीन पटाखे क्या होते हैं? पटाखा विक्रेता से लेकर आम लोग – सब हैं कन्फ्यूज!


सुप्रीम कोर्ट के फैसले में जिन कम प्रदूषण और कम आवाज़ वाले पटाखे यानी ग्रीन पटाखों का जिक्र है वो आखिर क्या है, सब हैं कन्फ्यूज!

नई दिल्ली (ईएमएस)। दिवाली के मद्देनजर पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक तरफ जहां लोगों में बैन हटने की खुशी है तो वहीं पर्यावरण अधिकारी भी इस मामले में संतोष जता रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले में जिन कम प्रदूषण और कम आवाज़ वाले पटाखे यानी ग्रीन पटाखों का जिक्र है वो आखिर क्या है?

दिल्ली में आपको अगर अभी पटाखे ख़रीदने हैं तो केवल उन दुकानों से मिलेंगे जिनके पास परमानेंट यानी साल भर का पटाखे बेचने का लाइसेंस है। दरअसल, जो दुकानदार केवल दिवाली के मौके पर पटाखे बेचते हैं, उन्हें अस्थाई लाइसेंस मिलता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अभी लाइसेंस जारी नहीं किए हैं। दुकानदारों में इस बात को लेकर कन्फ़्यूजन है कि दिवाली इतने नज़दीक है लेकिन दिल्ली पुलिस ने अभी तक लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।

हैरानी की बात यह कि दुकानदारों से लेकर खरीदारों तक किसी को भी इस पटाखों के बारे में नहीं पता। सदर बाज़ार पटाखा विक्रेता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता का कहना हैकि यह पहली बार सुनने में आया है कि ग्रीन तरह के भी पटाखे होते हैं, जिनसे प्रदूषण या आवाज़ ना हो। सदर बाज़ार में पटाखों के प्रमुख विक्रेता हरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि जिस तरह से पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में बैन लगाया था इस साल भले ही राहत मिल गई हो लेकिन अभी तक हमें लाइसेंस जारी नहीं किए गए।

सदर बाज़ार ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव देवराज का कहना है कि पिछले साल सदर बाज़ार में २८ दुकानों को अस्थाई लाइसेंस जारी किए थे लेकिन इस बार अभी तक कोई जानकारी नहीं है। उन्हें इस बारे में नहीं पता कि किस तरह के पटाखे बेचने हैं। पर्यावरण एक्सपर्ट माई ब्रीथ दिल्ली की संस्थापक रवीना राज कौल से इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। हालांकि एक्सपर्ट की मानें तो इन पटाखों में कैमिकल का कम से कम इस्तेमाल होगा।