एसआरएस घोटाला: एसबीआई को लगाया 628 करोड़ का चूना


स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने एसआरएस ग्रुप के डिफॉल्टर होने के ३३ माह बाद आखिरकार मान लिया कि एसआरएस ने बैंक के धोखाधड़ी की है।
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फरीदाबाद । फरीदाबाद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने एसआरएस ग्रुप के डिफॉल्टर होने के ३३ माह बाद आखिरकार मान लिया कि एसआरएस ने बैंक के धोखाधड़ी की है। एसआरएस लिमिटेड ने एसबीआई से ऋण लेकर चुकाया नहीं और बैंक के ६२८ करोड़ रू हड़पे है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा एसआरएस लिमिटेड नियुक्त इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (दिवालिया विभेदन पेशवर) ने इसकी जांच शुरू की तो जनवरी २०१९ में बैंक से धोखे की बात मानी। बैंक ने अभी भी पुलिस में इसकी शिकायत नहीं की है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने एसआरएस लिमिटेड की जांच के लिए इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल नियुक्त कर रखा है। इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल की जांच में सामने आया कि एसआरएस लिमिटेड को विभिन्न बैंकों ने ऋण के रूप में लिए थे। एसआरएस ने ऋण नहीं चुकाया और बैंकों का करोड़ों रुपये हड़प लिए। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ६२८.३१ करोड़, बैंक ऑफ इंडिया २२३.७९ करोड़, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया १२५.२४ करोड़, ओरियेंटल बैंक ऑफ कामर्स ६८.७८ करोड़, सिंडिकेट बैंक १४.१३ करोड़, एक्सि बैंक के ५४.९० करोड़ रुपये बकाया हैं। एसआरएस लिमिटेड ने अप्रैल २०१६ से ऋण की किश्त चुकाना बंद कर दिया था। इसके बावजूद बैंक ने एसआरएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अब जब इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल ने जांच शुरू की तो पिछले दिनों क्रेडिटर्स कमेटी की मासिक बैठक में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कमेटी को बताया कि उन्होंने एसआरएस द्वारा लिए गए ऋण को नहीं चुकाने पर उसे धोखाधड़ी मान लिया है। मगर यहां सवाल यह भी उठ रहा है कि बैंकों ने अभी तक एसआरएस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों को शिकायत क्यों नहीं की है। इस बारे में बैंक की ओर से क्रेडिटर्स कमेटी की बैठक में शामिल हुए बैंक के सहायक महाप्रबंधक अनिल कनौतरा से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में कुछ भी बताने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

एसआरएस लिमिटेड के खातों की जांच में जुटी ग्रांट थोर्टन कंपनी ने एसआरएस में एक बड़े घोटाले की बात कही है। ग्रांट थोर्टन ने जांच के बाद १४ फरवरी को अपनी रिपोर्ट इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल को सौंप दी है। उस रिपोर्ट के आधार पर क्रेडिटर्स कमेटी को बताया कि एसआरएस ने ज्वैलरी के कारोबार में जो १२९० करोड़ रुपये का लेनदेन दिखाया है, वह फर्जी है। कंपनी ने एसआरएस के देनदारों से संपर्क करने का प्रयास किया, मगर पता चला कि इनमें से अधिकांश कंपनियां या तो हैं ही नहीं या उनका कोई संपर्क नहीं है।

– ईएमएस