साईं बाबा को चार दिनों में करोड़ों का चढ़ावा


शिरडी के साईं बाबा की समाधि के 100 साल पूरे होने पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और चढ़ावा भी खूब चढ़ाया गया. चार दिनों में 6 करोड़ का दान दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को शिरडी में सांईबाबा के दर्शन किये। (Photo: IANS)

शिरडी,(ईएमएस)। श्रद्धा-सबूरी का प्रणेता शिरडी के साईं बाबा की समाधि के 100 साल पूरे होने पर समाधि शताब्दी समारोह में शिरडी में बाबा के भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. इस मौके पर चढ़ावा भी खूब चढ़ाया गया. ताजा आंकड़ों के मुताबिक 6 करोड़ का दान दिया गया. ये रिकॉर्ड महज चार दिनों का है जहां भक्तों ने खुलकर भेंट चढ़ाई.

बता दें, ऐसा पहली बार नहीं है कि शिरडी में साईं बाबा के दरबार में इतना दान चढ़ाया गया हो, इससे पहले भी भक्तों ने रिकॉर्ड तोड़ चढ़ावा चढ़ाया है, जिसे गिनने में स्टाफ के पसीन छूट गए थे. शिरडी में हर साल करोड़ों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. ऐसे में रुपया, पैसा, सोना, चांदी और कई बहुमूल्य चीजों का दान दिया जाता है.

अगर आकड़ों की बात करें तो पिछले साल 22 दिसंबर से 25 दिसंबर के मौके पर साईं बाबा दरबार में साढ़े 5 करोड़ रुपए का दान दिया गया. ये पांच करोड़ रुपये दान सिर्फ 4 दिनों में आए थे. वहीं हर रोज शिरडी के साईं बाबा को करीब डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा दान के रूप में मिलते हैं.

इसी साल (2018) में शिरडी के साईं बाबा मंदिर में तीन दिन तक चले गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान 6.66 करोड़ रुपये का दान मिला था. जिसमें 438.650 ग्राम सोना और 9353 ग्राम चांदी शामिल था. मालूम हो कि, समाधि शताब्दी समारोह 17 से 19 अक्टूबर तक चला था. 19 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां पहुंचे थे. माना जाता है कि पहले बाबा शिरडी आए थे और 1918 तक वो यहीं रहे थे. 15 अक्टूबर 1918 को बाबा ने शिरडी में समाधि ली थी.

साईं मंदिर ट्रस्ट की आमदनी में लाखों गुना इजाफा

साल 1922 में शिरडी मंदिर को ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर किया गया. तब दान पेटी से इकट्ठा होने वाली सालाना आय तकरीबन 700 रुपये थी जबकि, इसका सालाना बजट तकरीबन 3500 रुपए हुआ करता था. बाबा के भक्तों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ साईं मंदिर ट्रस्ट की आमदनी में भी लाखों गुना इजाफा हुआ और अब मंदिर ट्रस्ट की चढ़ावे से होने वाली आमदनी तकरीबन 375 करोड़ बताई जाती है. जो कि प्रतिदिन के हिसाब से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की है. साईं दरबार में इस्तेमाल किए जाने वाले फूलों को बाद में फेंका नहीं जाता है बल्कि एक खास प्लांट में इनसे सुगंधित अगरबत्ती तैयार की जाती है. करीब 40,000 महिलाओं को इससे रोजगार प्राप्त हो रहा है.