सबरीमाला मंदिर प्रवेश : सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारी पड़ रहे प्रदर्शनकारी


सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदर्शनकारी भारी पड़ते दिखे जब रविवार को भी दो महिलाओं को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।
(Photo: IANS)
  • भारी सुरक्षा में सबरीमाला मंदिर जा रही दो महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने वापस लौटाया
  • 10 से 50 साल की एक भी महिला अब तक नहीं कर सकी मंदिर में प्रवेश

तिरुवनंतपुरम (ईएमएस)। केरल के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदर्शनकारी भारी पड़ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे चुका है, जबकि प्रदर्शनकारी 10 से 50 साल आयुवर्ग महिलाओं को मंदिर में नहीं घुसने देने की जिद पर अड़े हैं।

रविवार को भी कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर जा रही दो महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। मंदिर के कपाट खुले पांच दिन हो रहे हैं और 10 साल से 50 साल के बीच की आयु वाली किसी भी महिला को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया है। शुरुआत में तो प्रदर्शनकारी इस तरह हावी रहे कि मंदिर की ओर जाने वाले सरकारी और निजी वाहनों को रोककर महिलाओं को वापस भेजा गया। अगले कुछ दिनों में पुलिस भारी सुरक्षा के बीच महिलाओं को मंदिर के द्वार तक लेकर गई तो वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों के सामने झुकना पड़ा।

कुछ दिन पहले सबरीमाला जाने वाली एक महिला पत्रकार सुहासिनी से प्रदर्शनकारियों ने अभद्रता और छेड़छाड़ की थी। रविवार को भी कड़ी सुरक्षा में दो महिलाओं को लेकर पुलिस मंदिर की ओर जा रही थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद दोनों को पंबा में पुलिस कंट्रोल रूम लाया गया। शेष श्रद्धालु मंदिर में बीते पांच दिनों से दर्शन करने दूर-दूर से आ रहे हैं।

केरल आईजी ने बताया कि वे नियमों की जानकारी होने के बाद स्वयं ही सबरीमाला नहीं जाना चाहती थीं। उन्होंने कहा वे आंध्र प्रदेश के एक श्रद्धालुओं के समूह का हिस्सा थीं और बाकी मंदिरों में भी जा चुकी थीं। उन्हें सबरीमाला के विशेष नियमों के बारे में नहीं पता था, जब उनसे किसी ने कहा कि वह मंदिर नहीं जा सकतीं तो वे स्वयं तय किया कि वे मंदिर में प्रवेश नहीं करेंगी।

राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का वह दावा खोखला नजर आ रहा है, जिसमें उन्होंने महिलाओं को सुरक्षा देने और कोर्ट के आदेश का समर्थन करने की बात कही थी। बीते दिनों अपनी बात से पलटते हुए केरल सरकार ने भी मंदिर मुद्दे पर ऐक्टिविज्म न करने की सलाह दी थी। खुद मंदिर के पुजारी भी प्रदर्शनकारियों के साथ हैं और महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के पक्ष में नहीं हैं।

राज्य में बीजेपी भी इसे मुद्दा बनाकर जमीन तलाश रही है और प्रदर्शनकारियों का पक्ष लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रही है। बीते शुक्रवार को भी दो महिलाओं ने आईजी के साथ करीब 250 पुलिसकर्मियों के सुरक्षा घेरे में मंदिर में प्रवेश की कोशिश की थी, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।

मंदिर में घुसने का प्रयास करने वाली महिला पत्रकार कविता जक्कल और सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा को बाहर से ही लौटना पड़ा था। इसके बाद फातिमा के कोच्चि स्थित घर में कुछ अज्ञात लोगों ने तोड़फोड़ भी की थी। विपक्षी कांग्रेस ने हिंदू धर्म के अलावा अन्य को मंदिर ले जाने की कोशिश करने पर पुलिस पर निशाना साधा है। कांग्रेस के नेता आर चेन्निथला ने कहा कि सबरीमाला मंदिर कोई पर्यटन स्थल नहीं है, सिर्फ श्रद्धालु ही मंदिर में जा सकते हैं।