लोकसभा चुनाव : बिहार की पांच सीटों पर मतदान आज


लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में बिहार में कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र की कुल मिलाकर पांच संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में कल मतदान होगा।
(Loktej File Photo)

पटना। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में बिहार में कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र की कुल मिलाकर पांच संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में कल मतदान होगा। मधेपुरा, सुपौल, अररिया, झंझारपुर और खगडिया में चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। तीसरे चरण में कोसी में तीन, सीमांचल और मिथिलांचल की एक-एक सीटे शामिल हैं। नवासी लाख से अधिक मतदाता 82 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कल करेंगे। कोसी क्षेत्र की सुपौल, मधेपुरा और खगडिया लोक सभा सीटों पर रोचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं। क्षेत्र में प्रभावशाली माने जाने वाले राजनीतिक दंपति सांसद पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीत रंजन मुकाबले में है। रंजीत रंजन जहां महागठबंधन में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड रहे हैं वहीं उनके पति पप्पू यादव खुद के खडे किये गये राजनीतिक दल जन अधिकार पार्टी से चुनाव लड रहे हैं।

मधेपुरा में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है राष्ट्रीय जनता दल ने शरद यादव, जदयू ने राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव को मुकाबले में उतारा है। वहीं पप्पू यादव अपनी सीट बचाने के लिए चुनावी मैदान में है। जदयू के एनडीए में चले जाने से गठबंधन का नया समीकरण बनने के कारण इस बार शरद यादव और पप्पू यादव दोनों ही बदले हुए दलों से चुनाव लड रहे हैं। मधेपुरा सीट पर सबसे अधिक जनता दल नामधारी पार्टियों का ही कब्जा रहा है। पिछले नौ लोकसभा चुनावों को देखे तो चार बार आरजेडी और दो बार जदयू का कब्जा रहा तथा जनता दल का तीन बार कब्जा रहा है। जनता दल लगातार टूट के कारण अब अस्तित्व में नही है। सुपौल इस क्षेत्र की सबसे नयी सीट है जो परिसीमन के बाद 2009 में अस्तित्व में आयी थी। इसमें मधेपुरा और सुपौल के इलाके आते हैं। परिसीमन बाद हुए पहले चुनाव में जदयू से विश्वमोहन कुमार और पिछले लोक सभा में रंजीत रंजन ने कांग्रेस से जीत हासिल की। जदयू ने रेलवे की सेवा छोडकर राजनीति में कदम रखने वाले दिलकेश्वर कामत को लगातार दूसरी बार मौका दिया है। वे पिछला चुनाव हार गये थे।
इस चरण में कोसी क्षेत्र की अन्य प्रमुख लोक सभा सीट खगडिया है। यहां मुख्य मुकाबला एनडीए से लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी चौधरी महबूब अली कैसर और महागठबंधन की ओर से विकास शील इंसान पार्टी के सर्वे सर्वा मुकेश सहनी के बीच माना जा रहा है। सहनी और उनकी पार्टी वीआईपी पहली बार लोक सभा मुकाबले में है। इसके प्रत्याशी तीन सीटों पर किस्मत आजमा रहे हैं। कोसी और इसकी सहायक नदियों की बाढ से हमेशा तबाह रहने वाले क्षेत्र में गरीबी और आधारभूत संरचना का अल्प विकास प्रमुख समस्याएं है। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुख स्टार प्रचारकों का फोकस इस बार राष्ट्रवाद, आतंकवाद और देश की सुरक्षा के मुद्दे पर ही रहा। नेपाल की सीमा से सटे अररिया लोक सभा क्षेत्र में भी गरीबी और पिछडापन चरम पर है। यह वह इलाका है जो महान आंचलिक कथाकार और साहित्यकार फणिश्वरनाथ रेणु की रचनाओं के केंद्र में रहा है। बडी संख्या में अल्पसंख्यक आबादी वाले अररिया में समस्याएं वहीं है जो साठ सत्तर साल पहले मौजूद थी। बदला है तो केवल युग ।

इस बार एनडीए की ओर से भाजपा पूर्व सांसद प्रदीप कुमार सिंह को टिकट दिया है वे पिछली बार दिग्गज नेता तस्लीमुद्दीन से एक लाख छियालीस हजार मतों के अंतर से चुनाव हार गये थे। राष्ट्रीय जनता दल ने प्रदीप कुमार सिंह के मुकाबले तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम को चुनावी मैदान में उतारा है। जो अपने पिता के निधन के बाद हुए उप चुनाव में जीत हासिल कर इस सीट से निवर्तमान सांसद हैं।

झंझारपुर की सीट मधुबनी जिले के विधान सभा क्षेत्रों को अलगकर बनायी सीट है। नेपाल की सीमा से सटे इस इलाके ने बिहार के साथ पडोसी देश की लोक संस्कृति पर छाप छोड़ी है। मिथिलांचल की इस धरती पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में एनडीए और महागठबंधन को टक्कर दे रहे हैं। एनडीए की ओर से जदयू प्रत्याशी रामप्रीत मंडल और राष्ट्रीय जनता दल से स्थानीय विधायक गुलाब यादव जीत के लिए कडी मेहनत कर रहे हैं। पुराने रुझान को देखे तो झंझारपुर सीट पर कभी भाजपा तो कभी आरजेडी तो कभी जनता दल यूनाइटेड का आना जाना लगा रहता है। सीट समझौते के कारण यह संसदीय क्षेत्र इस बार जदयू के कोटे में चला गया। यहां से निवर्तमान सांसद भाजपा के वीरेंद्र कुमार चौधरी को अपनी सीट गंवानी पडी।

– ईएमएस