भीषण जल संकट की चपेट में लातूर, 10 दिन में एक बार हो रही जलापूर्ति


महाराष्ट्र का लातूर जिले में एक बार फिर भीषण सूखे की चपेट में है। सूखे की वजह से फसलों पर बुरा असर पड़ा है।
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लातूर। महाराष्ट्र का लातूर जिले में एक बार फिर भीषण सूखे की चपेट में है। सूखे की वजह से फसलों पर बुरा असर पड़ा है। अब पीने के पानी को लेकर भी हाहाकार शुरू हो गया है। पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने की वजह से लातूर शहर में अब 10 दिन में एक बार पानी की सप्लाई हो रही है। लातूर की प्यास बुझाने वाले मांजरा बांध में दिसंबर महीने में ही पानी का लेवल ‘डेड स्टॉक’ तक पहुंच गया है। इस वजह से पिछले कुछ समय से सप्ताह में एक बार ही पानी की सप्लाई हो रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 दिन कर दिया गया है। इतना ही नहीं पानी की सप्लाई में भी 25 फीसदी की कटौती की गई है। निगम आयुक्त कौस्तुभ दिवेगांवकर ने बताया कि अगले 10 महीने तक लातूर के लोग पूरी तरह से मांजरा बांध में बचे हुए पानी पर निर्भर है। इसके अलावा 1150 बोरवेल है, जिससे शहरवासियों की पानी की जरूरत को पूरा किया जाएगा। ऐसे में टैंकरों से पानी की सप्लाई की जरूरत न पड़े, इसलिए कुछ बदलाव किए गए है।

मराठवाड़ा में महाराष्ट्र के 8 ज़िले आते हैं, जिसमें लातूर भी शामिल है। यहां पिछले कई वर्षों से भीषण सूखा पड़ रहा है। 2016 में हालत इतने बदतर हो गए थे कि यहां लोगों की प्यास बुझाने के लिए ट्रेन से पानी की सप्लाई करनी पड़ी थी। 2016 में राज्य के सूखाग्रस्त इलाकों में पानी को लेकर काफी खून बहा था। इसके बाद पानी पर संघर्ष को टालने के लिए लातूर में तत्कालीन कलेक्टर ने धारा 144 का सहारा लिया था। साथ ही कई जगहों पर होम गार्ड तैनात किये गये थे ताकि बड़ी संख्या में एकत्र हुए लोगों को नियंत्रित किया जा सके जिससे कानून एवं व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। इन इलाकों के लोगों की दिक्कत ये है कि वे कितना पानी स्टोर करके रखे। आखिर उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर अपनी जरुरतों को भी पूरा करना है। ऐसे में यहां के लोगों का जीवन बेहद कठिन हो जाता है।

– ईएमएस