भोजपुरी सितारे मनोज तिवारी और रवि किशन की नैया हुई पार, निरहुआ अनलकी रहे


PC : beforeprint.in

लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने कई फिल्मी एवं खेल जगत के सितारों को ‌टिकट दिया था। इसी सूची में भोजपुरी फिल्म और संगीत जगत की तीन नामी हस्तियों को भी शामिल किया गया था। जिसमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली से मनोज तिवारी, गोरखपुर से रवि किशन और आजमगढ़ से निरहुआ थे। तीनों भोजपुरी स्टार में से मनोज तिवारी और रवि किशन की नैया तो पार हो गई, लेनिक निरहुआ अनलकी रहे।

कांग्रेस और आप को प्राप्त वोट भी मनोज को हरा नहीं सकते

दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी का मुकाबला कांग्रेस की दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित एवं आप के दिलीप पांडे से था। इस मुकाबले में मनोज तिवारी दो लाख से भी अधिक के अंतर से बाज़ी मार गये हैं। शीला दीक्षित दूसरे और आप के दिलीप पांडे तीसरे नंबर पर रहे। कहा जा रहा था कि दिल्ली में आप और कांग्रेस का गठजोड़ हो जाता तो वे मिलकर भाजपा को टक्कर दे सकते थे। लेकिन यदि सभी उम्मीदवारों को प्राप्त मतों पर ध्यान दें तो कांग्रेस और आप को मिले वोटों को जोड़ भी दें तो भी वे भाजपा के मनोज तिवारी से पीछे ही रहे। मनोज तिवारी से जब शीला दीक्षित जैसी दिग्गज हस्ती को हराने पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने शायद शीला दीक्षित को मैदान में उतार कर उनसे पुराना गुस्सा निकाला है! इस उम्र में शीलाजी को मैदान में उतारना ही गलत था।

गोरखपुर से रवि किशन की आसान जीत

दूसरी ओर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र गोरखपुर से इस बार भोजपुरी स्टार रवि किशन को भाजपा ने टिकट दिया था। उत्तरप्रदेश और बिहार में रवि किशन युवाओं में बड़े लोकप्रिय हैं। शायद इसी का परिणाम है कि उन्होंने बड़ी आसानी से इस सीट पर कब्जा जमा लिया। रवि किशन का मुकाबला समाजवादी पार्टी के रामबहुल निषाद से था। दोनों में वोटो का अंतर दो लाख से अधिक रहा। उधर कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही और उसके प्रत्याशी मधुसूदन त्रिपाठी को बामुश्किल 18-19 हजार मत ही मिले। यानि गोरखपुर में तो कांग्रेस पार्टी वोट कटुवा पार्टी भी नहीं बन पाई।

निरहुआ को रास नहीं आई राजनीति

उधर उत्तरप्रदेश की ही आजमगढ़ सीट से भाजपा ने अन्य भोजपुरी सितारे निरहुआ को मैदान में उतारा था। निरहुआ को जिम्मेदारी दी गई थी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पटखनी देने की। लेकिन मुस्लिम बहुमत इस इलाके में निरहुआ अपना जादू नहीं चला पाये और मुंह की खानी पड़ी।