बनारस बनेगा भोजपुरी माई का मंदिर, स्थापित होगी 108 फीट ऊंची प्रतिमा


देश-विदेश में करोड़ों लोग जिस भोजपुरी भाषा को अपनी मां का दर्जा देते हैं, उनके लिए खुशखबरी है।
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वाराणसी । देश-विदेश में करोड़ों लोग जिस भोजपुरी भाषा को अपनी मां का दर्जा देते हैं, उनके लिए खुशखबरी है। शिव की नगरी बनारस में भोजपुरी माई का मंदिर आकार ले चुका है। बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या है। इसके अलावा, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और फिजी जैसे देशों से लेकर ब्रिटेन, अमेरिका और हालैंड में भी भोजपुरियों की बड़ी संख्या है। भोजपुरी के गौरव के प्रतीक के रूप में बनारस में भोजपुरी माई की 108 फीट ऊंची प्रतिमा लगाने की तैयारी की जा रही है। काशी यानी बनारस के बड़ा लालपुर में जीवनदीप पब्लिक स्कूल में भोजपुरी माई का मंदिर स्थापित किया गया है। अब काशी में 108 फीट ऊंची भोजपुरी माई की प्रतिमा स्थापित होनी है। बनारस में 21-23 जनवरी को होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान इसका भी शिलान्यास किया जा सकता है।

दरअसल इस वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस में, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ भी शामिल होने के लिए आ रहे हैं। उनका मूल निवास स्थान यूपी के बलिया जिले में है। इन दिनों जिला प्रशासन उनके गांव की भी पड़ताल करने में जुटा हुआ है। मॉरीशस और फिजी जैसे देशों में भोजपुरी काफी व्यापक स्तर पर बोली जाती है। गन्ने की खेती के लिए कभी पूर्वांचल और बिहार से मजदूर बनकर वहां गए लोगों ने भोजपुरी को और समृद्ध बनाने का काम किया है। भोजपुरी, प्रवासियों को हिंदुस्तान से जोड़ती है। चूंकि यह आयोजन इस बार भोजपुरी बेल्ट में हो रहा है, लिहाजा भोजपुरी को भी आयोजन में खासा महत्व दिया जा रहा है। बनारस में स्थापित की गई भोजपुरी माई की मूर्ति संभवत: विश्व की पहली प्रतिमा है, जो किसी भाषा को समर्पित की गई है।

इसे मॉरीशस के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसके बाद से यहां प्रतिमा पर नित्य माला फूल चढ़ाने के साथ ही भोजपुरी माई की प्रतिमा के पूजन का दौर भी शुरू हो चुका है। मॉरीशस के उच्चायुक्त ने अपने दौरे में 108 फीट की भोजपुरी माई की प्रतिमा स्थापित करने की बात कही थी। इस प्रतिमा को बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास बनने वाले प्रवासी भवन में स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने 108 फीट की भोजपुरी माई की प्रतिमा लगाने की चर्चा को बल देकर बोली को मां के तौर पर मान्यता दिलाने की भी कवायद काशी से शुरू की है।

– ईएमएस