रात्रि विश्राम पर प्रतिबंध लगने से कार्बेट में बिजनेस को नुकसान


वन विश्राम गृहों में रात्रि विश्राम पर रोक लगाने से स्थल का भ्रमण करने आने वाले बहुत से पर्यटकों की बुकिंग रद्द हो गयी है।
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देहरादून। कार्बेट टाइगर रिजर्व में उच्च न्यायालय द्वारा वन विश्राम गृहों में रात्रि विश्राम पर रोक और रिजर्व क्षेत्र के अंदर वाहनों के आवागमन पर नियंत्रण लगाने से स्थल का भ्रमण करने आने वाले बहुत से पर्यटकों की बुकिंग रद्द हो गयी है। जिसके कारण बिजनेस को काफी नुकसान हुआ है। सीटीआर के निदेशक राहुल ने बताया कि धारा, झिरना, ढेला, बिजरानी और ढिकाला सहित रिजर्व के विभिन्न भागों में स्थित वन विश्राम गृहों में रात्रि विश्राम पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिबंध लगाने से बड़ी संख्या में बुकिंग रद्द हुई है जिससे रिजर्व के राजस्व को भारी हानि हुई है। दुनियाभर में बाघों के लिए मशहूर कार्बेट रिजर्व में देश के अलावा विदेशों से भी भारी संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं। ढिकाला का उदाहरण देते हुए रिजर्व के निदेशक ने कहा कि ढिकाला जोन शुक्रवार से खुलने वाला है लेकिन हमेशा इस वक्त होने वाला उत्साह इस बार गायब है क्योंकि यहां वन विश्राम गृहों में कोई रात्रि विश्राम नहीं होगा और सफारी के लिये जाने वाली जिप्सीज की संख्या भी सीमित कर दी गई है।

वन अधिकारी ने बताया कि इस आदेश के चलते भारी संख्या में बुकिंग रद्द होने और पर्यटकों के देश के अन्य बाघ अभयारण्य में जाने को वरीयता देने से कार्बेट में पर्यटन व्यवसाय से जुडे लोग भी काफी निराश हो गये हैं। कार्बेट के बफर जोन में स्थित सीताबनी में स्थित एक रिजार्ट के महाप्रबंधक किरण सागर ने कहा कि रिजर्व में पर्यटन से संबंधित बिजनेस में कम से कम 50-60 फीसदी तक की गिरावट आयी है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा नियंत्रित किये जाने के बाद अब कार्बेट में एक दिन में 20 से ज्यादा जिप्सीज नहीं चल सकतीं।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने दस अगस्त को दिये अपने आदेश में कहा था, हमारा विचार है कि वन्यजीवों को बचाने के लिये किसी भी पर्यटक को राष्ट्रीय पार्को, संरक्षित जंगलों और रिजर्व जंगलों में रात भर ठहरने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। इससे पहले उच्च न्यायालय की इसी पीठ ने अपने एक आदेश में रिजर्व के विभिन्न जोनों में एक दिन में प्रवेश करने वाले वाहनों की संख्या को 100 तक सीमित कर दिया था।

– ईएमएस