युवराज पोखरना और एक सफल मीडिया सलाहकार बनने के लिए उनकी साहसिक यात्रा

युवराज पोखरना

गुजरात के प्रसिद्ध सूरत शहर के निवासी युवराज पोखरना युवावस्था से ही कुछ अलग करना चाहते थे और वास्तव में वे चीजों को एक विशेष दृष्टिकोण से देखते हैं और एक पृथक ढंग से करते हैं। डॉक्टर माता-पिता के घर 8 मार्च, 1991 को सूरत के बारडोली नामक स्थान पर जन्मे युवराज शुरू से ही एक शर्मीले स्वभाव और अंतर्मुखी व्यक्ति रहे हैं और "लाइट्स-कैमरा-एक्शन" भरी चकाचौंध से बहुत दूर रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से हुई और विज्ञान स्नातक (बीएससी) और विज्ञान स्नातकोत्तर (एमएससी) गणित विषय में  की। देश की सेवा करने का 'कीड़ा' काटने से पहले युवराज जेईई करने वाले विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य करते थे, देश सेवा के लिए वे एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ जुड़ गए।
राष्ट्रीय स्तर पर युवराज ने पहली बार देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कराया जब उन्होंने 22 जनवरी, 2019 को वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने का निर्णय किया था। जानते हैं क्यों? इस प्रश्न का उत्तर यह है कि उन्होंने अपने विवाह में आने वाले अतिथियों को राफेल सौदे के बारे में कुछ स्पष्ट तथ्य और जानकारी देने करने का विचार किया था, यह एक ऐसा कदम था जिसके कारण उन्हें आशीर्वाद स्वरुप भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से प्रशंसा प्राप्त हुई! युवराज द्वारा सरकार के राफेल सौदे और इससे देश के सैन्य और सुरक्षा बलों को कैसे लाभ होता है, के बारे में तथ्यों का ब्यौरा देने के लिए उनके विवाह के 'निमंत्रण पत्र' का उपयोग करने के लिए उन्हें एक सनसनी के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहुत कवरेज और प्रसंशा मिली।
इस सुखद घटना के घटित होते ही युवराज को यह अनुभति हुई कि उनको मिली प्रसिद्धि का उपयोग निज देश को और उत्कृष्ट बनाने में किया जा सकता है और इस प्रयोजन से उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता और इन्फ्लुएंसर के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया। युवराज को ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे प्रमुख नेताओं के साथ 'भिड़ने' के लिए भी जाना जाता है। देश के इन दिग्गज नेताओं के साथ हुई भिड़ंत को लेकर कुछ बढ़ा  चढ़ाकर नहीं लिखा जा रहा है बल्कि युवराज का सोशल मीडिया इस बात का साक्ष्य है।
जून 2019 में, 'जय श्री राम' का घोष लगाने वाले ग्रामीण लोगों को जब ममता बनर्जी द्वारा भाजपा के एजेंट बुलाने का एक वीडियो वायरल हुआ था, तब युवराज ने ममता बनर्जी को "वाल्मीकि रामायण" की पुस्तक प्रतिक्रिया स्वरूप भेजी थी। हालांकि ममता बनर्जी ने उनके इस उपहार को ठुकरा दिया था, लेकिन युवराज को उनके इस साहस और पुरुषार्थ के लिए बहुत प्रसंशा मिली थी। युवराज हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ भी भिड़ गए थे जब उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ विवाद में उलझी हुई थी। अभिनेत्री कंगना और उनके निर्भीक रुख का समर्थन करते हुए युवराज ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिपस्टिक भेजकर यह समझाने का साहसपूर्ण उद्यम किया कि आज की महिलाएं चार्ज लेने से नहीं डरतीं और कुछ भी कर सकती है। इसके साथ ही युवराज ने बहुत स्पष्ट शब्दों में अपनी अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा था कि उद्धव एक निकम्मे मुख्यमंत्री हैं और किसी राज्य पर शासन करने योग्य नहीं हैं।
युवराज की इस साहसी जीवनयात्रा की सूची में अगला पड़ाव मीडिया उद्योग था। वास्तव में, वह एक उभरते हुए लेखक और न्यूज़एक्स, द संडे गार्जियन आदि जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स के साथ स्तंभकार हैं। लेकिन यह साहसी और कुछ अलग करने वाला व्यक्ति यहां नहीं रुका। उन्होंने हाल ही में अपनी धर्मपत्नी साक्षी पोखर्णा के साथ मीडियाट्रिक्स-मल्टीमीडिया-प्राइवेट-लिमिटेड नामक एक मीडिया कंसल्टिंग फर्म शुरू की है, जिसमें वह सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनेताओं से लेकर अभिनेताओं की एक वृहद स्तर की सहायता कर रहे हैं । एक वर्ष से भी कम समय में उनकी फर्म ने 100 से अधिक लोगों को दुनिया के साथ अपनी कहानियों को साझा करने में सहायता की है और उन्हें इस डिजिटल जगत में सशक्त बनाया है।
युवराज की प्रोफाइल में इंजीनियर से शिक्षक फिर एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता होना सम्मिलित है। वह एक विचारक भी हैं और अतीत में स्तंभकार के रूप में अनेक मीडिया आउटलेट्स में अपना योगदान दे चुके हैं। देश में व्याप्त प्रशासनिक ढांचे का ज्ञान लेने और उसका पता लगाने के लिए युवराज ने अब इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में मास्टर्स इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एमपीए) के लिए प्रवेश लिया है। युवराज का इस देश को बेहतर और उत्कृष्ट जगह बनाने का दृढ़ निश्चय उनके सभी प्रोफेशनल करियर विकल्पों में देखा जा सकता है। अब बताईये कि हम आश्चर्यचकित क्यों नहीं हैं?

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