सूरत कपड़ा मार्केट बंद होने से वतन लौट रहे श्रमिक, मिलों में काम हुआ आधा

रात्रि कर्फ्यु के कारण टेक्सटाईल मार्केटों समय में परिवर्तन किया गया

कोरोना के कारण व्यापार उद्योग की कमर टूट गई है। कपड़ा बाजार बंद होने के बाद उससे जुड़े अन्य उद्योगों की भी हालत लचर होते जा रही है। डाईंग- प्रोसेसिंग यूनिटो में जॉब वर्क नहीं मिलने के कारण 50% से अधिक डाइंग प्रोसेसिंग यूनिट बंद हो गए हैं और काम करने वाले श्रमिक अपने वतन गांव की ओर लौट गए हैं। कोरोना ने व्यापार का माहौल खराब कर दिया है। 10 दिन के अधिक समय से सूरत का कपड़ा बाजार बंद है। माल नहीं बिकने के कारण कई विवर्स ने भी लूम्स कारखाने बंद कर दिए हैं। दूसरी ओर जॉबवर्क की कमी के कारण प्रोसेसिंग यूनिट भी बंद होने लगे हैं। 50% से अधिक डाइंग प्रोसेसिंग यूनिट बंद हो चुके हैं। जबकि कुछ मिलो में  सप्ताह में 2 से 3 दिन की छुट्टियां दी जा रही है। बड़ी संख्या में श्रमिकों का पलायन जारी है।
प्रतिकात्मक तस्वीर
श्रमिकों का पलायन अभी भी जारी, बढेगी मुसीबत
शहर के कई क्षेत्रों में से लग्जरी बस में बैठकर श्रमिक अपने गांव की ओर जा रहे हैं। ऐसे में यदि व्यापार उद्योग चालू भी रहे तो भी श्रमिकों की कमी के कारण बंद करना पड़ेगा। फिलहाल इन तमाम कारणों से इंडस्ट्री की क्षमता 30% उत्पादन की ही रह गई है। साउथ गुजरात टैक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के प्रमुख जीतू वखारिया ने बताया कि कपड़ा मार्केट बंद होने के कारण जॉब वर्क घट गया है। 
व्यापारियों ने नए ऑर्डर देने बंद कर दिए हैं इतना ही नहीं पहले से जो माल तैयार किया है वह उसका स्टोक भी यूनिट में पड़ा है। इसके कारण गोडाउन भी भर गए हैं। फिलहाल की परिस्थिति देखते हुए यदि सरकार उद्यमियों के लिए बिजली बिल में माफी और साथ ही गैस बिल भी कम नहीं किया गया तो उद्योग को दोबारा पटरी पर आने में दिक्कत हो सकती है। 

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