युद्ध के बीच युक्रेन में रह रहे इस भारतीय डॉक्टर ने बनवाया अपने पालतू जानवरों के लिए बम प्रूफ आवास

किसी भी चिड़ियाघर ने डॉक्टर गिरिकुमार के ब्लैक पैंथर और जगुआर को रखने से किया इंकार तो डॉक्टर साहब अपने जानवरों के साथ युक्रेन में ही रुके, घर बनवाने का खर्च 80 लाख का

बीते तीन महीने से रूस और युक्रेन के बीच युद्ध चल रहा हैं। इस युद्ध में दोनों ही देशों को बहुत नुकसान हुआ है। इनके अलावा अन्य देश भी इसके असर से जूझ रहे हैं। युद्ध शुरू होने से पहले भारत सरकार ने ऑपरेशन गंगा लौंच कर अपने नागरिकों को युक्रेन से बाहर निकल लिया पर भारतीय मूल के डॉक्टर गिरिकुमार पाटिल पिछले छह साल से यूक्रेन में रह रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच तनाव के कारण कई भारतीय भारत लौट आए हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश के डॉक्टर गिरिकुमार ने अपने जानवरों के साथ यूक्रेन में रहने का फैसला किया। उनके पास ब्लैक पैंथर और जगुआर हैं।
मार्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, गिरिकुमार पाटिल ने करीब 20 महीने पहले कीव चिड़ियाघर से दो पालतू बिल्लियों को गोद लिया था और बिल्लियों को यूक्रेन में छोड़कर भारत आने से इनकार कर दिया था। इतना ही नहीं  गिरिकुमार पाटिल ने अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए 80 लाख रुपये से अधिक का बम प्रूफ शेल्टर बनाया है। उन्होंने कहा, "मैं 200 मीटर लंबा बम प्रूफ आवास बना रहा हूं।" मेरे पास कोई रास्ता नहीं है क्योंकि चिड़ियाघर इन जानवरों को रखने के लिए तैयार नहीं है। वे आगे कहते हैं कि मेरे माता-पिता मुझे बुला रहे हैं और घर बुला रहे हैं, लेकिन मैं अपने जानवरों को नहीं छोड़ सकता। यूक्रेन के तनावपूर्ण माहौल में दो महीने बाद आखिरकार उसने भारत आने का फैसला किया, लेकिन स्थानीय सिपाही ने भी उसे अपराधी समझकर धमकाया।
आपको बता दें कि पाटिल का कहना है कि भारत आने के बाद वो अधिकारियों से मिलकर अपने पशुओं को भारत लाने के लिए जो भी करना होगा वो करेंगे। पाटिल 2007 में मेडिसिन की पढ़ाई करने यूक्रेन आए थे और 2014 से ऑर्थोपेडिक सर्जन के तौर पर काम कर रहे हैं।

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