रसायनों के निर्यात एवं स्थानीय कारोबार में मंदी के कारण सूरत के केमिकल कारोबार में गिरावट

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद से स्थिति और खराब हो गई है

बीते छः महीने से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का रासायनिक उद्योग पर बड़ा असर पड़ा है। रूस पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण यूरोप समेत दुनिया के कुछ देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। इसलिए कुछ उद्योग बंद होने पर हैं। जिसका सीधा असर केमिकल इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। विदेशों में रंगों और रसायनों के निर्यात में 25 प्रतिशत की कमी आई है। दूसरी ओर भारत में कपड़ा, फार्मेसी, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में मंदी के कारण घरेलू बाजार में रासायनिक व्यापार में भी कमी आई है। ऐसे में रासायनिक उद्योग में एक समस्या बना हुआ है। बड़ी इकाइयों को भी नुकसान से बचाने के लिए इकाइयों को बंद करने का समय आ गया है।

छोटी और मझोली इकाइयों के बंद होने के कगार पर


रासायनिक उद्योग के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सूरत और दक्षिण गुजरात सहित राज्य भर में बड़े पैमाने पर रासायनिक उद्योग फैल गया है। सूरत और दक्षिण गुजरात में रासायनिक इकाइयां विभिन्न उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले रंगों और रसायनों का निर्माण करती हैं। यह रसायन कपड़ा, फार्मेसी, कृषि सहित कई उद्योगों में बेचा जाता है। इसके अलावा कुछ उद्योगपतियों को यहां से जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, थाईलैंड, इंडोनेशिया, अमेरिका, ब्राजील समेत देशों में निर्यात किया जाता है। पिछले छह माह से रसायन उद्योग की हालत खराब है। बड़े उद्योगपतियों का कहना है कि मौजूदा समय में वे लगातार घाटे में चल रही हैं, जबकि छोटी और मझोली इकाइयों के बंद होने की आशंका जताई जा रही है।

वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है इसका असर


उद्योगपतियों का कहना है कि वैश्विक मंदी का असर केमिकल उद्योग पर देखने को मिल रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद से स्थिति और खराब हो गई है। रूस दुनिया के कई देशों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करता है। युद्ध की शुरुआत के बाद, दुनिया के कुछ देशों ने रूस की निंदा की और वहां से कोई आर्थिक लेन देन नहीं करने का फैसला किया और आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद से उद्योगों के लिए परेशानी शुरू हो गई है। अमेरिका, यूरोप समेत देशों की कुछ औद्योगिक इकाइयों में प्राकृतिक गैस की अनुपलब्धता के कारण उत्पादन बंद कर दिया गया है। जिससे वहां की इकाइयों ने भी रसायनों का आयात बंद कर दिया है, जिससे स्थानीय रासायनिक उद्योग का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। मंदी के चलते रासायनिक इकाइयों के उत्पादन में 50 प्रतिशत की कटौती की है। कुछ बड़ी इकाइयों को भी बंद करने को मजबूर किया जा रहा है। मांग नहीं होने से पूरा कारोबार अस्त-व्यस्त है और कारोबारियों को भी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि निकट भविष्य में समस्या का कोई अंत नहीं दिखाई दे रहा है।


निर्यात में 25 फीसदी की गिरावट


रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण, दुनिया के कुछ देशों ने रूसी प्राकृतिक गैस सहित सामानों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे सूरत में औद्योगिक संकट पैदा हो गया है और देश से निर्यात होने वाले रंगों और रसायनों में कमी आई है। इसके अलावा घरेलू बाजार में भी कपड़ा, फार्मेसी, कृषि समेत सभी क्षेत्रों में मंदी के कारण रसायन उद्योग को संकट का सामना करना पड़ा है।

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