दुल्हे घोड़ी नहीं चढ़ रहे, घोड़ों-बग्गी मालिकों के लिये अस्तित्व का संकट लाया कोरोना

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

लोग बेच रहे घोड़े और बग्गियां, इस व्यवसाय से जुड़े लोग बदल रहे धंधा

गुजरात में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। ऐसे में शादी ब्याह के आयोजन भी रद कर दिए गए हैं। कम लोगों की उपस्थिति में शादी हो रही है। जिसका सीधा असर इवेंट आयोजकों पर हो रहा है। शहर में 40 से अधिक बग्धी और 70 से अधिक घोड़े बिक गए हैं। कई बग्धी वाले यह व्यापार छोड़ रहे हैं। यदि परिस्थिति नहीं सुधरे तो इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की मुसीबत और बढ़ जाएगी।लंबे समय से बग्धी के व्यवसाय से जुड़े सादिक भाई ने बताया कि हमारे व्यवसाय में इस तरह की मंदिर पहले कभी नहीं थी। 
कोरोना के पहले सूरत में डेढ़ सौ से 200 बग्धियां थी जिसमें कि 40 से अधिक  बग्धिया बिक गई है। 50% व्यापारी व्यवसाय से निकल गए हैं। हमारे पास पहले 11 घोड़े थे हमने मंदी के कारण 3 घोड़े बेच दिए। बग्धी और घो़ड़ों का रखरखाव खर्च भी मुश्किल होते जा रहा है। पहले प्रतिदिन 300 का खर्च होता था लेकिन अब घास की कीमत बढ़ जाने से यह भाव 400 से 500 हो गया है। घास का भूसा, श्रमिकों का पगार सहित अन्य खर्च बढ़ने के कारण हमें मुश्किल हो रही है। जिसके कारण बग्धी वालों की हालत पतली हो गई है। कोरोना के पहले शादी में बग्धी का 3 घंटे का किराया 7000 से 10000 था लेकिन कोरोना के कारण 1000 से 5000 में ऑर्डर लिए जा रहे हैं। पहले पूरे साल में बग्धी वालों को 50 के करीब आर्डर मिलते थे लेकिन कोरोना के कारण शादी और धार्मिक कार्यक्रम पर नियंत्रण लग गया है जिसके कारण लोग बग्धी के ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। 
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)
दिसंबर में चुनाव होने से 15 दिन तक कुछ आर्डर मिले थे। चुनाव के दौरान हमें भी थोड़े बहुत आर्डर मिल गए थे। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने फिर से व्यापार ठंडा कर दिया है। अब बग्धी से जुड़े व्यवसाय परिस्थिति को समझते हुए दूसरे छोटा मोटा काम करने लगे हैं। उनका कहना है कि ज्वार के कीमत में वृद्धि होने के कारण मुसीबत खड़ी हुई है। पिछले साल 16 से17 रूपए में मिलने वाले ज्वार की कीमत इस बार 21 से 22 रूपए हो गई है। इसी तरह 500 में मिलने वाले भूसा 800 रूपए की कीमत पर मिल रहा है।

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