सूरत : आपके पास विकल्प है! इसका सार समझकर किशोरभाई ने कि नशामुक्त जीवन की शुरुआत

किशोर भाई अब परिवार के साथ नशामुक्त जीवन जी रहे है

शराब के नशे में डुबे व्यक्ति को अदाणी फाऊन्डेशन की टीम के सदस्यों ने उनके परिवार और कार्यालय के कर्मचारियों से मुलाकात की

अदाणी फाउंडेशन के सदस्यों ने किशोरभाई के परिवार को नशामुक्ति परिवर्तन ट्रस्ट के बारे में बताया
नशे की शुरुआत में तुम नहीं समझते कि एक दिन नशा तुम पर हावी हो जाएगा । कई बार व्यक्ति परिस्थितियों के कारण नशे के गलत रास्ते पर निकल जाता है लेकिन फिर उसे इस रास्ते से वापस कैसे निकुल यह समज नही पाता। कुछ ऐसा ही 45 साल के किशोर भाई पटेल के साथ हुआ।
सूरत के चोर्यासी तालुका के मोरा गांव के मूल निवासी किशोरभाई के दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी। दोनों बच्चे काम करते हैं और खेती भी करते हैं, जिससे परिवार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त कमाई होती है। लेकिन 2002 में किशोरभाई की मां की मृत्यु के बाद किशोरभाई के जीवन में मुश्किलें आने लगीं। अचानक परिवार और 3 बड़ी बहनों की जिम्मेदारी उन पर आ गई। काम और परिवार ठीक होने की कोशिश करने के बजाय, वे अपने दुख में डूब जाते और इस प्रकार, अधिक विफलता का अनुभव करते हैं।
किशोरभाई करीब 20 साल से नशे में थे और समय के साथ उनकी हालत बिगड़ती चली गई। अंतिम 5-6 साल में उसने शराब पीकर अपनी पत्नी और बच्चों को पीटना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं गांव के लोगों साथ लड़ते थे। हालात ऐसे हो गए कि घरवालों, बाहरवालों से भी उसका व्यवहार बिगड़ने लगा। किशोरभाई एक महीने में गिनती करते हुए केवल 10-15 दिनों के लिए काम पर जाने लगे। शराब पीकर आने पर कार्यालय से काम पर न आने को भी कहा । इस बीच, अदाणी फाउंडेशन की टीम के सदस्यों ने उनके परिवार और कार्यालय के कर्मचारियों से मुलाकात की। उन्हें किशोरभाई की लत के बारे में पता चला यह 2020 का समय था। 
अदाणी फाउंडेशन के सदस्यों ने किशोरभाई के परिवार को नशामुक्ति कार्यक्रम के बारे में बताया। किशोर भाई 21 दिनों के लिए परिवर्तन ट्रस्ट के नशामुक्ति केंद्र में भेजने के लिए राजी किया। अंत में किशोरभाई, फरवरी 2021 में 20 दिनों के लिए इस नशामुक्ति कार्यक्रम में शामिल हों गए वह से भी भगाने का प्रयास किया गया।  लेकिन टीम के समझाने पर उन्होंने यहां 21 दिन का कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद उन्होंने नियमित अनुवर्ती सत्रों में भाग लेना भी शुरू कर दिया। फिर उसने कसम खाई कि वह अब शराब का नशा नही करेंगे।  इतना ही नहीं अब वह गांव के अन्य लोगों को भी शराब से दूर रहने के लिए मना रहा है है। अब तक वह दो अन्य लोगों को इस नशामुक्ति कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए राजी कर चुका है। इन दोनों लोगों ने इस कार्यक्रम को पूरा भी किया है। नशे से मुक्ति पाकर किशोर भाई को पुरानी नौकरी
भी मील गई है। वह अब लगन से अपना काम कर रहा है। उनके सहयोगियों औरकिशोर भाई के काम से सीनियर्स भी खुश हैं।
अपने नशा मुक्त जीवन के बारे में बात करते हुए किशोर भाई कहते हैं, मुझे ऐसा परिवार देने के लिए  भगवान का शुक्र है। मुझे यह जानकर अफ़सोस हुआ कि मेरे परिवार को मेरी ज़रूरत थी तब मै उनके साथ नहीं रह सका। मेरा नशा ही मुझे हर जगह ले जाता रहा था। लेकिन मेरा परिवार ने भी मुश्कील समय में मेरा साथ दिया। 
किशोरभाई की पत्नी वसंतीबेन ने कहा, 'अब वह नशा मुक्त जीवन जी रहे हैं। इसमें से अधिकांश परिवार के साथ समय बिताएं और परिवार के साथ भोजन करें। वास्तव में मैं अदानी फाउंडेशन का आभारी हूं। क्योंकि वह हर समय हमारे साथ रहे हैं। अगर यदि आपमें मजबूत मनोबल है तो आप नशे से मुक्ति पा सकते हैं और परिवार और सुख के साथ एक नया जीवन जी सकते हैं।और किशोर भाई इसका उदाहरण बन गए हैं।

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