सूरत कपड़ा उद्योग : कोयला रुला रहा; प्रोसेसर जॉब चार्ज बढ़ा नहीं सकते, फैब्रिक में ग्राहकी पड़ी है कमजोर

प्रतिकात्मक तस्वीर

पिछले डेढ़ महीने में 20 फीसदी तक बढ़े हैं कोयले की कीमत, 4500 रुपए प्रति टन थी, 5400 रुपए पहुंच गई

इस समय कपड़ा उद्योग भयंकर मंदी से गुजर रहा है। कपड़ा उद्योग में प्रोसेसर के लिए भी दयनीय स्थिति पैदा हो चुकी है। खपत की कमी के कारण तैयार कपड़ों में जॉब वर्क की कमी होती है। वहीं दूसरी तरफ पिछले डेढ़ महीने में कोयले के दाम में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और कपड़े के दाम बढ़े हैं।हालांकि, जॉब चार्ज में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
कपड़ा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले छह माह से खुदरा बाजार में मांग कम होने से सूरत में भी कपड़ा बाजार में ठंड का माहौल है। नतीजतन प्रोसेसिंग यूनिटों में भी सिर्फ 50 से 70 फीसदी जॉब वर्क मिल रहा है। दूसरी ओर कच्चे माल के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे प्रोसेसर परेशान हैं। अंतरराष्ट्रीय कारणों और डॉलर के प्रभाव के कारण, प्रोसेसर्स पिछले डेढ़ महीने में कोयले की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। जिसका सीधा असर कपड़े की कीमत पर पड़ता है। हालांकि, चूंकि ट्रेड कमजोर है, इसलिए प्रोसेसर जॉब चार्ज बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं।
आपको बता दें कि प्रोसेसर्स का कहना है कि दिवाली के दौरान कोयले की कीमतों में तेजी आई और फिर गिरावट आई, हालांकि पिछले डेढ़ महीने में ये फिर से 20 फीसदी तक बढ़े हैं। कोयले की कीमत जो 4500 रुपए प्रति टन थी, 5400 रुपए पहुंच गई है। जिस तरह से अब अंतरराष्ट्रीय समीकरण बदल रहे हैं, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में कीमत और बढ़ सकती हैं।गौरतलब है कि इंडोनेशिया के कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सरकार ने ऑस्ट्रेलिया से कोयला आयात करने की अनुमति दी है, लेकिन यह कुछ उद्योगपतियों को ही फायदा हो रहा है।

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