सूरत : जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक तक के लिये कपड़ा कारोबारियों को राहत!

प्रतिकात्मक तस्वीर

मानो या न मानो! दिल्ली में फोस्टा की पेशकश और उद्योग संगठनों के सांकेतिक बंद का असर तो हुआ ही है!

सूरत सहित देश भर के कपड़ा कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। जीएसटी काउंसिल की शुक्रवार को दिल्ली में हुई बैठक में कपड़े पर जीएसटी को पांच से बारह प्रतिशत करने के पूर्व में लिये गये निर्णय को अगली जीएसटी काउंसिल की बैठक तक के लिये टाल दिया गया है।
जैसे ही जीएसटी काउंसिल में जीएसटी वृद्धि को टालने की सूचना कपड़ा कारोबारियों को मिली, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गौरतलब है कि जब से जीएसटी में वृद्धि की अधिसूचना नवंबर महीने में जारी की गई थी, तभी से कपड़ा व्यापारी इसके विरोध में थे। स्थानीय स्तर से दिल्ली में वित्तमंत्री स्तर तक कपड़ा अग्रणियों ने अपना पक्ष रखा था और जीएसटी वृद्धि से उद्योग पर होने वाले विपरीत असर से उन्हें अवगत कराया था। 
सूरत में कपड़ा व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था फोस्टा और उद्योग जगत के प्रतिनिधि समान चैंबर ऑफ कोमर्स के अग्रणियों ने दिल्ली में वित्त मंत्री से मिलकर पेशकश की थी। स्थानीय सांसदों सी आर पाटिल और कपड़ा मंत्री दर्शनाबेन जरदोष भी उनके साथ थीं। 
उद्योग संगठनों की पेशकश का शुरू में तो असर फिका पड़ता दिखा था और संकेत मिल रहे थे कि सरकार इस मामले में नर्मी दिखाने के मुड़ में नहीं है। लेकिन जमीनी स्तर पर कपड़ा कारोबारियों में रोष बढ़ता जा रहा था। 
आम तौर पर माना जाता है कि व्यापारी वर्ग भारतीय जनता पार्टी का कमटिड वोटर व समर्थक रहा है। लेकिन जब कारोबार और रोजी-रोटी पर असर होता दिखा तो व्यापारियों में भाजपा के प्रति भी खुल कर बयानबाजी करनी शुरू कर दी। वैसे भी केंद्र सरकार पिछले दिनों बड़ी मुश्किल से किसान आंदोलन की तपिश से अपने आपको निजात दिला पाई है। ऐसे में सरकार किसी नये आंदोलन को पनपने नहीं देना चाहती थी।
प्रतिकात्मक तस्वीर
कपड़ा व्यापारियों में सुगबुगाहट थी कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है, तो बढ़ी हुई दर पर कारोबार न करके विरोध प्रदर्शन करना चाहिये। उधर सूरत में फोस्टा सहित अन्य उद्योग संगठनों में अपने-अपने स्तर पर तीस दिसंबर को एक दिन का सांकेतिक बंद का आह्वान कर दिया। जमीन स्तर पर बढ़ रहे रोष का भनक सरकार को लगी। गुजरात प्रदेश अध्यक्ष सी आर पाटिल के सूरत के एक कार्यक्रम में मंच से खुले तौर पर कपड़ा व्यापारियों के पक्ष में दिये गये बयान से आशा बंधी। वहीं आनन-फानन में 31 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक बुला कर कपड़ा व्यापारियों को फौरी राहत दे गई है। 
इस बात में कोई दो राय नहीं की फोस्टा के प्रयासों और अन्य संगठनों के साथ मिलकर एक दिन के सांकेतिक बंद का असर जरूर पड़ा है। अब मामला जीएसटी काउंसिल की फरवरी में होने वाली अगली बैठक में विचाराधीन रहेगा। क्या उस बैठक में जीएसटी पांच प्रतिशत ही रखने का आखिरी निर्णय ले लिया जायेगा या कोई नया झोल पैदा होगा, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। वैसे कपड़ा व्यापारी सचमुच में बारह प्रतिशत की जीएसटी नहीं चाहते तो उन्हें सरकार में पेशकश करने और भविष्य में एकजुट होकर सामुहिक रूप से इस पूरे मामले में अपना पक्ष रखने के लिये नीति निर्धारित करनी पड़ेगी। खैर, व्यापारियों के लिये दो महीने के लिये ही सही, अच्छी खबर तो आ ही गई है!

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें