सूरत : शहर के एमटीबी कॉलेज में गणपति उत्सव में मास्क-सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ीं

गणपति उत्सव के उपलक्ष्य में छात्र कोरोना को भूल गए।

बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं गरमा घूमीं

तीसरी लहर की आशंका  के बीच सरकार ने गणेश उत्सव मनाने का भी फैसला किया है। परंतु सूरत शहर में एसओपी का उल्लंघन होता दिखाई पड़ रहा है।  विभिन्न गणेश मंडलों में भारी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं और आशंका है कि इससे शहर में कोरोना की संख्या में इजाफा हो सकता है। गणेश पंडाल में जुटे लोग कोरोना को न्यौता दे रहे हैं।  सूरत के मशहूर एमटीबी कॉलेज में छात्रों ने कैंपस के अंदर गणपति की स्थापना की है। जिसमें बड़ी संख्या में छात्र एकत्रित हुए और गरबा की। एक भी छात्र चेहरे पर मास्क नहीं पहना था और सामाजिक दूरी  का तो सवाल ही नहीं उठता। यानी कोरोना काल से पूर्व की तरह गरबा उत्सव मनाया।  
शहर के मशहूर एमटीबी कॉलेज में छात्रों ने कैंपस के अंदर गणपति की स्थापना की है। उत्सव मनाने के लिए बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज परिसर में जमा हो गए। जिसमें सभी छात्र गरबा करते नजर आए। बड़ी चिंता की बात यह थी कि भारी संख्या में छात्र-छात्राएं इकट्ठा होकर गरबा पर घूमते नजर आए, मानो नवरात्रि हो। एक भी छात्र के चेहरे पर मास्क न दिखना इस बात का संकेत है कि वह कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर का शिकार होने जा रहा है।
सार्वजनिक एजुकेशन सोसाइटी द्वारा छात्रों को कॉलेज परिसर में गणपति स्थापित करने की अनुमति दी गई थी लेकिन छात्रों द्वारा जिस तरह से समारोह आयोजित किया जा रहा है वह वास्तव में बहुत चिंताजनक है। इस तरह की लापरवाही ही कोरोना को फिर से जन्म देती है और इसके परिणामस्वरूप शहर के नागरिकों के लिए कई तरह की परेशानी पैदा हो जाती है। यहां तक ​​कि लोगों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। 
सार्वजनिक एजुकेशन ट्रस्ट के चयेरमैन  कमलेश याज्ञनिक ने कहा, "जहां तक ​​मैं देख सकता हूं, केवल डेढ़ सौ छात्रों ने गरबा किया है। हालाकि छात्रों के मास्क न पहनने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है।" लेकिन अगर इतनी बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए हैं तो ऐसा करना ठीक नहीं है। सरकार द्वारा दी गई कोरोना गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाए। आयोजन करने वाले छात्रों से संपर्क कर सही तथ्य जानकर जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करूंगा।

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