सूरत : 105 वर्षीय दादीमां के बोल, ‘बेटा, कोरोना मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा!’

(Photo Credit : twitter.com/GujHFWDept)

दादी के मजबूत मनोबल के सामने कोरोना ने भी मानी हार, सभी के लिए एक मिसाल बनी दादी माँ

“बेटा, मेरी चिंता मत करों,मुझे कुछ नहीं । कोरोना मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकता....!” ये शब्द अगर कोई नवजवन कहे तो समझ आ सकता है पर यदि कोई सौ साल से अधिक उम्र वाला व्यक्ति ऐसा कहता है तो ये आश्चर्य में डालने वाली बात है। ऐसा मन गया है कि इस कोरोना से जंग जितने के लिए शारीरिक रोगप्रतिरक्षण क्षमता के साथ साथ दृढ़ इच्छा शक्ति और सकारात्मक सोच की जरूरत है। और अगर इच्छा शक्ति दृढ़और सोच सकारात्मक हो तो आप बड़े आराम से इस महामारी को हरा सकते हैं। यह साबित किया है कि सूरत की 105 साल की ऊजीबा गोंडलिया ने। खुद के कोरोना पॉजिटिव होने पर वह घबराई नहीं, बल्कि अपने परिजनों को भी समझाया। जब उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया तो ऊजीबा ने डॉक्टर से कहा कि बेटा, कोरोना मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है... मुझे कुछ नहीं होगा, देखना जल्दी ठीक होकर घर जाऊंगी। ऊजीबा गोंडलिया ने अपने इसी जज्बे से कोरोना को हरा दिया।
जानकारी के अनुसार, 105 वर्षीय ऊजीबा मूलत: राजकोट जिले के गोंडल तहसील के सुलतानपुर गांव की है और सूरत में सचिन में अपने 19 सदस्यीय संयुक्त परिवार में रहती हैं। ऊजीबा स्वतंत्रता आंदोलन सहित कई ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी रही हैं। 105 वर्षीय ऊजीबाने मात्र 9 दिन के उपचार के बाद कोरोना को हरा दिया। ऊजीबा के मनोबल से अस्पताल का स्टाफ भी प्रभावित है। ऊजीबा के बारे में बेटे गोविंद गोंडलिया ने बताया कि मां ने खेतों में खूब मेहनत की है। वह इस समय में भी मेहनत करने से पीछे नहीं हटती। आज भी वह अपना ज्यादातर काम खुद ही करती हैं। उनकी श्रवण शक्ति आज भी कायम है। देशी खुराक और मेहनत के कारण दवाखाने नहीं ले जाना पड़ता है।
आपको बता दें कि ऊजीबा दादी का उपचार करने वाले डॉ. अनिल कोटडिया ने बताया कि ऊजीबा को 11 अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर भर्ती किया गया था। उन्हें बुखार, सर्दी और कमजोरी थी। तीन दिन में ही उनकी हालत में सुधार दिखने लगा। उनकी रिकवरी देखकर पूरा अस्पताल बहुत प्रभावित हुआ है। सिर्फ ऊजीबा ही इतने दिन नहीं जी रही, उनके अलावा उनकी दो बहने 101 साल, दो भाई 108 और 103 साल जिए। साथ ही 97 साल की आयु में गिरने से उनकी कमर की हड्‌डी टूट गई थी। ऑपरेशन के जरिए स्टील का गोला डाला गया था।

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