सूरत : कपड़ा कारोबारियों की मांग, मार्केट चालू करो; फुटकर वैल्यू एडिशन काम करने वाली महिलाओं की रोजी-रोटी भी प्रभावित

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : rvv.co.in)

पिछली बार भी कोरोना की प्रथम लहर में करोड़ों का नुकसान हुआ था,

कपड़ा मार्केट बंद रहने के कारण विवर, प्रोसेसर, एंब्रॉयडरी सहित कपड़ा उद्योग से जुड़े कई घटक बंद का सामना कर रहे हैं। कपड़ा बाजार बंद रहने से कपड़ा उद्यमियों का हजारों करोड रुपए का पेमेंट भी अटक गया है। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए हैं। कपड़ा बाजार में से साड़ियां और ड्रेस मटेरियल लाकर डायमंड स्टोन और टिक्की,बूंदी का काम करने वाली हजारों महिलाएं भी बेरोजगार हो गई है। कई दिन से बंद की परिस्थिति के कारण लेस-धूपियन के व्यापार को 200 करोड़ का नुकसान हुआ है।
रात्रि कर्फ्यु के कारण टेक्सटाईल मार्केटों समय में परिवर्तन किया गया
बीते साल जब कोरोना की प्रथम लहर आई थी तो लग्नसरा और रमजान तथा रक्षाबंधन आदि त्योहारों की खरीदी पर बुरा असर पड़ा था। इस साल भी कोरोनावायरस के कारण एक अंदाज के अनुसार विवर,प्रोसेसर और ट्रेडर का 10000 करोड रुपए का पेमेंट फस गया है। 350 डाइंग मिल में से सिर्फ 5% चल रही हैं। जिसके चलते कपड़ों पर वैल्यू एडिशन का काम भी धीमा हो गया है। लेस-धुपियन के कारोबार में सूरत में लगभग 18000 व्यापारी जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक व्यापारी को प्रतिदिन लगभग 50000 का व्यापार मिलता था लेकिन कई दिन से यह मार्केट बंद रहने के कारण उन्हें व्यापार गंवाना पड़ रहा है। एक अंदाज के अनुसार उन्हें 200 करोड रुपए का व्यापार गंवाने की नौबत आई है। लेस के व्यापारी अनूप सोलंकी ने बताया कि व्यापारी प्रतिदिन 50000 से 60000 का व्यापार करते थे लेकिन एक महीने से ऑर्डर नहीं मिल रहा हैं। साथ ही दिल्ली, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में लेसपट्टी और गोटा पट्टी आदि भेजे जाते थे वह भी नहीं जा रहे हैं। जिसके चलते लाखों का माल स्टॉक हो गया है। 
लेस-धुपियन एसोसिएशन के प्रमुख प्रवीण भालाणा का कहना है कि बंद के पहले हजारो महिलाएं लेसपट्टी और डायमंड स्टोन आदि का काम करते थी लेकिन अब वह बंद हो जाने के कारण वह भी बेरोजगार हो गई है।व्यापारियों को लगभग 200 करोड़ का नुकसान हुआ है। दूसरी ओर कॉन्फ़िडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के गुजरात रीजन के प्रमुख प्रमोद भगत ने बताया कि मिनी लॉकडाउन के कारण कई दिनों से रिटेल सेक्टर बंद है। जिसका असर सूरत में भी दिख रहा है। रिटेल व्यापारियों को लगभग 1500 करोड़ रूपए का नुकशान पहुंचा है। हम इस बारे में राज्य सरकार और केंद्र सरकार से गुहार लगाएंगे।

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