दक्षिण गुजरात : तटीय क्षेत्र के लोग वर्षों से जिसे खूब चाव से खाते रहे वो गलेली तो इम्युनिटी बूस्टर निकली!

(Photo Credit : Twitter/@dhaval241086)

नवसारी जिले के गणदेवी तहसील में गर्मी की शुरुआत से ही एक बार फिर से कोरोना तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में वहां के लोगों ने प्यास का विकल्प ढूंढने के लिए और ठंडक प्रदान करने वाली ताड़ के फल गिलेली को विकल्प बनाया है। सूरत,ओलपाड सहित दक्षिण गुजरात के कई क्षेत्रों में ताड़ के पेड़ बड़े पैमाने पर हैं। 
वहां से फलों को तोड़कर समय दक्षिण गुजरात नवसारी,वलसाड, गणदेवी, वापी में बेची जा रही है। बड़ी संख्या में श्रमजीवी इसे बेचकर चैत्र,वैशाख,ज्येष्ठ महीने तक रोजी-रोटी कमाते हैं। इसकी डिमांड भी बढ़ गई है जिससे कि एक दर्जन गिलेली का भाव 100 तक पहुंच गया है। लेकिन फिर भी लोग इसे पसंद कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि गीली में कई पोषक तत्व होते हैं।  जो शरीर का तापमान नियंत्रित करते हैं। यह कई रोगों में रामबाण माना जाता है। इसका स्वाद लीची फल जैसा होता है और खाने में मीठे पानी की तरह होने से लोगों को पसंद आती है। कोरोना काल में रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ाने के लिए लोग इसे भी पसंद कर रहे हैं।

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