श्रावण के पहले सोमवार को हर हर महादेव के मंत्रों से गूंज उठा सोमनाथ

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सोमवार होने के नाते दिखी श्रद्धालुओं की भीड़, आयोजकों ने किया कोरोना दिशानिर्देशों का पालन

श्रावण मास का हिन्दू मान्यताओं में बहुत विशेष महत्व है। इस में भगवान भोलेनाथ की पूजा का बहुत खास माना जाता है। श्रावण मास के पहले सोमवार को पवित्र तीर्थ स्थल सोमनाथ पर शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।  भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए सुबह से ही लोगों की लंबी लाइन लगी हुई थी। इतनी लंबी कतार के बाद सोमनाथ में शिवलिंग के दर्शन कर श्रद्धालु धन्य हो गए।
आपको बता दें कि श्रावण मास के दौरान पूरे देश में भगवान शिव की पूजा की जाती है।  सोमनाथ मंदिर में देश-विदेश से शिव भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं। ऐसे में श्रावण मास के पहले सोमवार को सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में भक्तों की लंबी कतारें देखी गई और भक्तों को भगवान सोमनाथ की प्रान्त आरती और उनके दर्शन से आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। भूदेव द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भक्तों ने पालकी जुलूस में भगवान सोमनाथ के मुखरविंद रूप के दर्शन किए।
आपको बता दें कि सोमनाथ महादेव मंदिर गुजरात का एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, इसलिए श्रावण मास में इसका महत्व बहुत बढ़ जाता है। पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। हालांकि इन सबके बीच ट्रस्ट ने कोविड की गाइडलाइन को ध्यान में रखा है।  सोमनाथ में श्रावण मास के दौरान दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की है, ताकि न तो भीगें और न ही धूप से परेशान हो।
इस श्रावण मास की पूर्व संध्या पर उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल भी सोमनाथ पहुंचे। उनके साथ सोमनाथ ट्रस्ट के सचिव पी. लाहेरी ने महाप्रबंधक विजयसिंह चावड़ा के साथ-साथ तंत्र अधिकारियों के साथ बैठक की।
गौरतलब है कि शास्त्रों में भगवान शिव के प्रिय रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन है। कहा जाता है कि शिवजी की आंख से गिरे आंसू को आम बोलचाल में रुद्राक्ष कहते हैं, रुद्राक्ष की माला बहुत ही खास होती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वालों को मानसिक शांति, शारीरिक कष्टों से मुक्ति के साथ-साथ सौभाग्य की प्राप्ति होती है।  रुद्राक्ष की माला का उपयोग जप के लिए भी किया जाता है।  रुद्राक्ष विभिन्न प्रकार के होते हैं।

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