नई बीमारी 'मंकीपॉक्स', समलैंगिकों में फैलने का अधिक रहता है जोखिम

ब्रिटन में विगत महीनों ऐसे नौ मामलों के प्रकाश में आने के बाद स्वास्थ्य ऐजेंसियां सतर्क हुईं

कोरोना महामारी से पिछले दो-ढाई वर्षो से जूझ रहे चिकित्सा जगत के लिए अब एक और नई बीमारी प्रकट हुई है। इस बीमारी को मंकीपॉक्स नाम दिया गया है। इस बीमारी के फैलने के कारणों का फिलहाल तो डॉक्टरों को पता नहीं है फिर भी प्रारंभिक तौर पर ऐसा माना जा रहा है कि यह जानलेवा रोग सेक्सुअल रिलेशनशिप के कारण भी हो सकता है। यदि मंकीपॉक्स से पीड़ित किसी व्यक्ति के साथ कोई सेक्स करता है तो उसके इस बीमारी से संक्रमित होने का खतरा रहता है।
जानकारों के अनुसार वैसे तो मंकीपॉक्स हमारे यहां होने वाले चिकनपॉक्स के प्रकार की ही बीमारी है, लेकिन अभी तक इस बीमारी के फैलने का कारण या इसका इलाज खोजा नहीं जा सका है। हालांकि इस बीमारी से जुड़े कुछ लक्षणों के बारे में डॉक्टरों को जानकारी अवश्य हुई है जिसमें गर्दन, पीठ और सिर में दर्द, बुखार, थकान और शरीर पर छोटे-छोटे निशान समाविष्ट हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि मई 2022 के प्रारंभ में इंग्लैंड में मंकीपॉक्स के 9 मामले दर्ज हुए थे। इससे पहले नाइजीरिया में एक मामला प्रकाश में आया था। इन मामलों को लेकर ब्रिटन का स्वास्थ्य मंत्रालय सतर्क हो गया है। उनका मानना है कि मंकीपॉक्स एक दुर्लभ वायरस है और वह सरलता से नहीं फैलता।
ब्रिटेन में अब तक मंकीपॉक्स के जो मामले सामने आए हैं उनमें ऐसे पुरुष शामिल हैं जो मूल रुप से गे या बायसेक्सुअल है। यानी समलैंगिक पुरुषों में इस बीमारी के होने का जोखिम अधिक है। अभी तक मंकीपॉक्स को सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज नहीं माना जाता था परंतु अब स्वास्थ्य विशेषज्ञ गे और बाय सेक्सुअल पुरुषों को चेतावनी दे रहे हैं कि वे इस बीमारी के प्रति सतर्क रहें और किसी भी तरह का लक्षण दिखाई दे तो तुरंत सेक्सुअल हेल्थ चेकअप कराएं।
मंकीपॉक्स क्या है इस बारे में जानकारी प्राप्त करें तो पता चलता है कि यह फ्लू जैसी एक बीमारी है जिसमें लिंफ नोड में सूजन आ जाती है। चेहरे और शरीर पर दाने उभर आते हैं और यह संक्रमण 2 से 4 सप्ताह तक चलता है। यह वायरस लोगों में आसानी से नहीं फैलता। मरीज के शरीर के प्रवाही या मंकीपॉक्स के जख्म के संपर्क में आने पर इस बीमारी के फैलने की संभावना रहती है। विशेष रूप से बंदरों, चूहों और गिलहरियों जैसे संक्रमित प्राणियों के संपर्क में आने से भी इस बीमारी के होने का जोखिम रहता है। वायरस से दूषित वस्तुओं जैसे कि बिस्तर या कपड़ों के संपर्क में आने पर भी यह बीमारी होती है।
बीमारी के लक्षणों की बात करें तो बुखार, सिर दर्द, सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा एक बार बुखार के उतर जाने के बाद पूरे शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां हो जाती हैं, चेहरे पर फुंसी होने की शुरुआत होती है। इसके अलावा आम तौर पर हाथ की हथेली और पैरों के तलवों में भी फुंसी देखी जा सकती है। फुंसियों में खुजली की शिकायत रहती है। धीरे-धीरे यह फुंसियां सूखकर पपड़ी की तरह गिर पड़ती हैं और दाग रह जाते हैं। 14 से 21 दिनों तक यह चेक यह संक्रमण देखने को मिलता है।

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