जिन्होंने वैक्सीन लगवाई थी ऐसे कई कोरोना वायरस की दूसरी लहर में बच गये!

ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले

कोरोना वायरस की दूसरी लहर पिछले साल आई पहली लहर की तुलना में अधिक घातक सिद्ध हुई है। पिछले दिनों जिस प्रकार के हालात देश भर सहित गुजरात में देखे गये वह दिल दहलाने वाले थे। अस्पतालों में बिस्तर नहीं थे, दवाइयों की किल्लत थी और यहां तक कि श्मशान गृहों में अंतिम संस्कार के लिये भी कतारें थीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों ने कोरोना वैक्सीन लगवा ली थी ऐसे सैंकड़ों लोगों पर कोरोना की इस दूसरी लहर का घातक असर नहीं हुआ और बड़ी संख्या में लोग बच गये।
कोरोनो वायरस संक्रमण की तीसरी लहर के बारे में जानकार कहते हैं कि वह ऐसे लोगों को जोखिम में डाल देगी, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें टीका नहीं लगा होगा। इन्फेक्सियस डिसीज कन्सलंटंट और स्टर्लिंग अस्पताल, अहमदाबाद के डायरेक्टर डॉक्टर अतुल पटेल कहा कहना है कि यह एक वैज्ञानिक धारणा है कि एक तीसरी लहर आयेगी, इसलिए अभी से कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता है। लेकिन भविष्य में हालात कैसे भी हों जिन्होंने टीका नहीं लगाया होगा उन पर अधिक जोखिम होगा। साथ ही कोमोर्बिड लोगों को टीका लगवा लेने के बाद भी सावधान रहना चाहिए।
डॉ. अतुल पटेल ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन के परीक्षण यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में शुरू हो गए हैं। अब इस आयु वर्ग के लिये वैक्सीन जब उपलब्ध होगी तब होगी, लेकिन वर्तमान में जिस आयु वर्ग को वैक्सीन उपलब्ध की जा रही है, उन्हें समय रहते वैक्सीन के दोनों डोज ले लेने चाहिये। 
आज गुजरात कोविड टास्क फोर्स की मुख्यमंत्री विजय रुपानी के साथ बैठक हुई जिसमें प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. तेजस पटेल, डॉ. तुषार पटेल सहित सभी सदस्यों ने कोरोना की दूसरी लहर को अंकुश में लेने के लिए टीकाकरण पर जोर दिया।
प्रतिकात्मक तस्वीर
चर्चा में यह बात भी उभर कर सामने आई कि कोरोना संक्रमण के दूसरे चरण में अस्पताल में आने वाले सैकड़ों रोगियों में पाया गया कि उनके निदान में देरी हुई। प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर मरीजों ने इलाज शुरू नहीं किया और जब ऑक्सिजन का स्तर गिरने लगा तब वे इलाज के लिये दौड़े। इतना ही नहीं कई मामलों में मरीजों ने रैपीड या आरटी पीसीआर परीक्षण के बाद स्वयं ही रेमिडिविविर जैसे इंजेक्शन लेने के लिये दबाव बनाया, तो कुछ ने खुद ही स्टेरोइड दवाएं शुरु करवा दीं। स्टेराइड लाइफ सेविंग ड्रग है और इसे शुरु में नहीं लिया जाता, ऐसे में इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।  
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. तेजस पटेल के अनुसार कोरोना वायरस का व्यवहार समझ से परे है, ऐसे में अगर इसका प्रारंभिक चरण में इलाज किया जाता है, तो रोगी को कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन जब मरीज को गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल लाया जाता है, तो फेफड़ों के संक्रमण को खत्म करने के अलावा, अगर उसे उच्च रक्तचाप या मधुमेह है, तो उसे स्टेरॉयड दवा की सही मात्रा दी जानी चाहिए। उच्च डी-डाइमर वाले कई रोगियों को रक्त पतला किया जाता है और ऐसे रोगियों को जल्द से जल्द सीने में दर्द या भारीपन महसूस होने पर किसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। जिससे डिस्चार्ज होने के बाद रक्त के थक्के जमने और मृत्यु होने को रोका जा सके। जिन गंभीर रोगियों को स्टेरॉयड दिया गया हो, जिन रोगियों में अनियंत्रित शुगर है, उन्हें डिस्चार्ज होने के बाद शुगर नियंत्रण के लिए अपने चिकित्सक से उपचार लेना चाहिए।

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