जानिए मुंबई की शान होटल ताज महल पैलेस के निर्माण की रोचक दास्तान

गुजरात के फेसबुक पेज से साभार, एक देशभक्त के दिल पर लगी चोट ने रख दी ताज की नीव

आज के समय शायद ही कोई हो जिसने ताज होटल का नाम न सुना हो। देश के सबसे बेहतरीन होटल में रहना और खाना हर किसी का सपना होता है। मुंबई में स्थित इस होटल की खूबसूरती की चर्चा पूरी दुनिया में होती है। समुद्र तट पर स्थित यह होटल मुंबई की शान है। जिसे देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।  यह दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी हॉस्पिटैलिटी कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी एचसीएल द्वारा पेश किए जाने वाले दुनिया के सबसे शानदार होटलों में से एक है। ताज होटल की गुणवत्ता और आतिथ्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। साथ ही ताज ब्रांड फाइनेंस द्वारा दुनिया के सबसे मजबूत होटल ब्रांड का दर्जा दिया गया है। यूके की ब्रांड वैल्यूएशन कंसल्टेंसी ब्रांड फाइनेंस ने इस साल की "2021 में होटल 50" रिपोर्ट जारी की है जिसमें टाटा समूह के होटल ब्रांड को दुनिया का सबसे मजबूत होटल ब्रांड बताया गया है।
ताजमहल होटल के निर्माण के पीछे एक रोचक कहानी छुपी हुई है जो शयद आप नहीं जानते है अरब सागर की ऊंची ऊंची उठने वाली लहरों से तर होने वाली ये ताज की ईमारत मुंबई के सर का ताज है। ये ताज होटल देश की ट्रेडमार्क ईमारत है। इतिहास पर नजर डालें तो तारीख 7 जुलाई, 1896 थी। देश विदेश में है सिनेमा के जनक लुमायर भाइयो ने अपनी पहली फिल्म का शो मुंबई के आलीशान वॉटसन होटल में किया था। इन शो को देखने के लिए मात्र ब्रिटिश लोग आये थे क्योंकि वॉटसन होटल के बाहर एक तख्ती लगी रहती थी जिस पर लिखा रहता था "भारतीय और कुत्ते होटल के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते।" 
लुमिरे बंधुओं के इस शो को देखने के लिए बड़ी संख्या में अंग्रेज आए। जमशेदजी टाटा भी शो देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें एंट्री नहीं मिली और विला के मुहाने के गेट से लौटना पड़ा। इसका कारण यह है कि वह एक भारतीय थे। उस पल में उन्होंने फैसला किया कि उन्हें अंग्रेजों को सबक सीखना है।
घटना के दो साल बाद मुंबई में समुद्र तट पर एक शानदार इमारत खड़ी कर दी गई।  और इसका नाम "होटल ताज" रखा गया। यह पूरे भारत में पहला पांच सितारा होटल था। यह मुंबई का पहला होटल था जिसमें बिजली का कनेक्शन था।14 दिसंबर 1903 में यह सुन्दर होटल बनकर तैयार हो गया था। जमशेदजी टाटा अपने अपमान को नहीं भूले। उस समय इस होटल के दरवाजे पर एक तख्ती भी लटकती थी। जिस पर लिखा होता था ब्रिटिश और बिल्लियां अंदर नहीं आ सकती।
116 साल पुराणी इस ईमारत में 560 कमरे एवं 44 सुइट्स है।उद्धघाटन के दिन 17 मेहमान इस होटल में रुके थे, जिनका किराया एक कमरे का सिर्फ 10 रूपये था। उस समय इस होटल के निर्माण में लगभग 25 लाख रूपये खर्चा आया था। इस होटल को बनाने का काम अंग्रेज इंजीनयर डब्लू ए चैंबर्स को दिया गया था। उन्ही की देख रेख में इसका निर्माण हुआ था और इसका श्रेय खान साहेब सोराबजी रतन जी को भी जाता है।

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