जानें, बकौल पीएम नरेंद्र मोदी - क्यों है हिंदी का भविष्य उज्ज्वल!

प्रतीकात्मक छवि (Photo Credit pixabay.com)

भारत के यूनेस्को द्वारा चिह्नित धरोहर स्थलों के ब्योरे को अपनी वेबसाइट पर हिंदी में प्रकाशित करने पर जताई सहमति

कल विश्व हिंदी दिवस था. 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्वभर में हिंदी के महत्व को सम्मान देने के लिए विश्व हिंदी दिवस की शुरुआत की थी. ऐसे में कल विश्व हिंदी दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी के प्रसार को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारे ज्ञान और संस्कृति के प्रसार में काफी अहम भूमिका निभा रही है।
आपको बता दें कि विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदी अपनी सरलता की वजह से हमारे ज्ञान और संस्कृति के प्रसार में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि सूचना और तकनीक के क्षेत्र में हिंदी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल और युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता की वजह से आने वाले समय में इस भाषा का भविष्य काफी उज्ज्वल दिख रहा है। इस बीच भारत के लिए यूनेस्को की तरफ से भी एक खुशखबरी आई है। हिंदी को सम्मान देने के लिए यूनेस्को ने एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए विश्व धरोहर केंद्र ने भारत के यूनेस्को द्वारा चिह्नित धरोहर स्थलों के ब्योरे को अपनी वेबसाइट पर हिंदी में प्रकाशित करने पर सहमति जताई है। उधर विश्व हिंदी दिवस पर विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी की तरफ से कार्यक्रम का नेतृत्व किया गया। इसमें पीएम मोदी के साथ-साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर की ओर से हिंदी के महत्व को लेकर बात की गई।
साथ ही इसी कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिंदी को वैश्विक पटल पर ले जाने के अपने लक्ष्य और विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी ने विदेश में हिंदी की पढ़ाई को बढ़ावा देने से जुड़े कदमों के बारे में बात करते हुए बताया कि भारत की भाषा, संस्कृति और पढ़ाई को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी के प्रसार के लिए तेरह पदों के साथ 50 पद बनाए गए हैं। 
विदेश राज्यमंत्री द्वारा दिए गये आंकड़ों के अनुसार विश्वभर में 100 देशों के 670 शिक्षण संस्थानों में हिंदी भाषा पढ़ाई जाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विदेश मंत्रालय के निर्देश के जरिए हिंदी का वैश्विक स्तर पर बढ़ना जारी रहेगा। उन्होंने हिंदी में बेहतर ढंग से काम करने के लिए बरेली, चंडीगढ़ और बेंगलुरु के पासपोर्ट दफ्तरों की सराहना भी की।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें