रात भर लाशों के बीच मुर्दाघर में रखा, सुबह पुलिस आई तो पता चला बंदा जिंदा है!

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

एक नहीं दो-दो अस्पतालों ने जिंदा व्यक्ति को बताया मुर्दा

डॉक्टर होना एक बहुत जिम्मेदारी का काम है। लोग डॉक्टर पर बहुत भरोसा करते है। इतना ही नहीं इन्हें तो धरती का भगवान कहा जाता है। ऐसे में अगर कोई डॉक्टर काम को लेकर लापरवाही करें तो उसका परिणाम बहुत भारी साबित हो सकता है। डॉक्टर द्वारा लापरवाही का ऐसा ही एक मामला मुरादाबाद में देखने को मिला है जहां पर एक्सीडेंट के पीड़ित व्यक्ति को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर रात भर मुर्दाघर में रखा।
आपको बता दें कि इसके बाद सुबह जब पुलिस पंचनामा और जांच करने के लिए पहुंची तो देखा कि व्यक्ति की सांसे चल रही है। इसके बाद तो आनन-फानन में पुलिस व परिजनों ने पीड़ित को जिला अस्पताल के इमरजेंसी में दोबारा भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया गया। बाद में पीड़ित को मेरठ रेफर कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार संभल जनपद के निवासी और नगर निगम में लाइन मैन लाइट के पद पर काम करने वाले श्रीकेश गुरुवार रात 9:30 बजे डेयरी से दूध खरीदने जा रहे थे तभी बाइक में टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद परिजन घायल श्रीकेश को लेकर विवेकानंद अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, इसके बाद जब सभी जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां भी डॉ मनोज यादव ने श्रीकेश को मृत घोषित कर उनके शव को मुर्दाघर में रखवा दिया। अगले दिन सुबह 10:30 बजे दरोगा मोर्चरी पहुंचे और पंचनामा भरने की प्रक्रिया शुरू की इस दौरान देखा कि श्रीकेश की सांसे चल रही हैं। फिर श्रीकेश को अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।

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