जगन्नाथपुरी मंदिर: एक रहस्यमयी मंदिर जहाँ जंजीरों में कैद हैं पवनपुत्र हनुमान

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जगन्नाथपुरी का मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां के रहस्य विज्ञान को भी मात दे देते हैं

जगन्नाथजी का नाम सुनते ही सबका सर श्रद्धा से झुक जाता हैं। जगन्नाथजी का मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है। इस मंदिर में बहुत से रहस्य हैं फिर चाहे वह मंदिर की अधूरी लकड़ी की मूर्तियों की बात हो या किसी भी विमान या पक्षी मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ पाना, अपने आप में ये अनसुलझी पहेली हैं। जगन्नाथ पुरी मंदिर समंदर किनारे पर है। मंदिर में एक सिंहद्वार है। कहा जाता है कि जब तक सिंहद्वार में कदम अंदर नहीं जाता तब तक समंदर की लहरों की आवाज सुनाई देती है, लेकिन जैसे ही सिंहद्वार के अंदर कदम जाता है लहरों की आवाज गुम हो जाती है। इसी तरह सिंहद्वार से निकलते वक्त वापसी में जैसे ही पहला कदम बाहर निकलता है, समंदर की लहरों की आवाज फिर आने लगती है। जगन्नाथपुरी का मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां के रहस्य विज्ञान को भी मात दे देते हैं। लेकिन मंदिर के आसपास कुछ ऐसे रहस्य भी हैं जिन्हें जानकर को हैरानी होगी। एक ऐसा है किस्सा है हनुमान जी का रहस्य। आइए इस रहस्य को विस्तार से जानते हैं।
एक पौराणिक कथा के मुताबिक़, जगन्नाथपुरी मंदिर में जब भगवान जगन्नाथ की मूर्ति स्थापित  हुई तो उनके दर्शन की अभिलाषा समुद्र को भी हुई। प्रभु दर्शन के लिए समुद्र ने कई बार मंदिर में प्रवेश किया। जब समुद्र मंदिर में प्रवेश करते तो मंदिर को बहुत क्षति होती। समुद्र ने ऐसा कई दफ़ा करने की कोशिश की। ऐसे में मंदिर की क्षति को देखते हुए भक्तों ने भगवान से मदद के लिए गुहार लगाईं। तब भगवान जगन्नाथ जी ने समुद्र को नियंत्रित करने के लिए हनुमान जी को भेजा। पवनसुत हनुमान जी ने समुद्र को बांध दिया। यही कारण है कि पुरी का समुद्र हमेशा शांत रहता है।
इसके बाद एक दिन समुद्र ने एक चतुराई लगाईं और हनुमान जी को दर्शन के लिए उकसाता हैं। ये बात सुनकर हनुमाजी जगन्नाथजी के दर्शन के लिए जाते हैं। हनुमान के पीछे पीछे समंदर भी मंदिर में जाने लगते है। सागर ने मंदिर को फिर से क्षतिग्रस्त कर दिया। तब भगवान जगन्नाथजी ने हनुमान जी के इस आदत से परेशान होकर उन्हें स्वर्ण बेड़ी से बांध दिया। जगन्नाथपुरी के समुद्र तट पर आज भी कैदी हनुमानजी का प्राचीन मंदिर है।

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