“जाको राखे साइया मार सके ना कोय!” फेफड़ों में 85% संक्रमण के बाद भी इस व्यक्ति ने कोरोना को हराया

प्रतीकात्मक छवि (Photo Credit : Wikimedia.org)

34 दिन की लड़ाई के बाद कोरोना को हराकर घर वापस लौटे हितेशभाई, अपने आप में अनोखा मामला

इस कोरोना के दौर में हमने देखा हैं कि कई स्वस्थ, हष्टपुष्ट लोग कोरोना के सामने जीवन का जंग हार गए और दुनिया को अलविदा कहते हुए हमारे बीच से चले गए वहीं कई उमरदराज लोग इससे ठीक होकर अपने घर वापस आ गए। एक बार फिर वडोदरा के पूर्वी हिस्से में भी एक ऐसा मामला सामने आया हैं जहाँ एक ऐसे व्यक्ति ने कोरोना को मात दे दिया जिसके बचने की संभावना नहीवत हो चली थी। 49 वर्षीय मरीज ने कोरोना से अस्पताल में 34 दिनों तक लड़ाई लड़ी और अंततः उसे हरा कर ही दम लिया। हैरानी की बात ये हैं कि एक समय डॉक्टरों ने मरीज के बचने की संभावना बहुत कम मां ली है।
“मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत” जैसे मामले को चित्रार्थ करते हुए शहर के वाघोडिया रोड इलाके में मानव मंदिर सोसाइटी के रहने वाले 49 वर्षीय हितेश पटेल अप्रैल की शुरुआत में कोरोना से संक्रमित हुए। हितेशभाई तीन दिन घर में क्वारंटाइन रहे। RTPCR की रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद, हितेशभाई ने चेस्ट सीटी स्कैन कराया, जिसमें केवल 2% संक्रमण पाया गया। घरेलू अलगाव के चौथे दिन, हितेशभाई का ऑक्सीजन स्तर अचानक 83 प्रतिशत तक गिर गया। परिवार और दोस्तों ने बाद में हितेशभाई को एक आयुर्वेदिक  निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहाँ मेडिकल जांच में पता चला कि उनके फेफड़ों में 85 प्रतिशत संक्रमण था। हितेशभाई की हालत गंभीर थी और डॉक्टर ने उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। हितेशभाई को दो बार वेंटिलेटर, बाइपैप और ऑक्सीजन के साथ प्लाजा में ले जाया गया और 12 रिमेडिक्विविर इंजेक्शन दिए गए।
अपने पति के स्वास्थ्य के बारे में पूछने पर डॉक्टर ने उनकी पत्नी को बताया कि उनके पति की हालत गंभीर थी और जीवित रहने की संभावना केवल 30 प्रतिशत थी। लगातार 20 दिनों तक ICU में रहने के बाद हितेशभाई की तबियत में सुधर देखा गया। हितेशभाई को आईसीयू से बाहर ले जाया गया और 12 दिनों तक निगरानी में रखा गया। अस्पताल में 34 दिनों की लड़ाई के बाद, हितेश पटेल अंत में कोरोना को हराकर करके घर लौट आया है।
अपको बता दें कि हितेशभाई की पत्नी, मां और भाई सहित परिवार के कुल छह सदस्य कोरोना संक्रमित थे। हितेशभाई की पत्नी को उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि माँ और भाई को अन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक समय परिवार के 6 सदस्य कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे।

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