इंदौर : नारी सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण, सिर्फ महिलाएं संभाल रही हैं 'गैरेज ऑन व्हील्स', लगभग 50 महिलाएं कर रही हैं मैकेनिक के रूप में काम

इस शहर के लोगों को अब अपने दोपहिया वाहन या सर्विसिंग या रिपेयरिंग के लिए गैरेज नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि अब गैरेज उनके घर फोन पर आ जाएगा। गैरेज में कोई पुरुष नहीं बल्कि महिला मैकेनिक होगी और गैरेज वाहन की चालक भी एक महिला होगी।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ संध्या व्यास द्वारा 8 मार्च को गैराज ऑन व्हील्स को हरी झंडी दी गई। इसके तहत मारुति वैन को गैरेज के रूप में विकसित किया गया है। उल्लेखनीय है कि अब तक इसी समाज द्वारा लगभग 150 महिलाओं को टू व्हीलर मैकेनिक के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है और वर्तमान में लगभग 50 महिलाएं मैकेनिक के कार्य में लगी हुई हैं। इस संबंध में इस संस्था द्वारा इंदौर शहर में दो ऐसे गैरेज स्थापित किए गए हैं, जिन्हें केवल महिला मैकेनिक ही चला रही हैं। इस प्रयास ने इंदौर को देश की पहली महिला मैकेनिक गैरेज की पहचान दिलाई है।
इसी सोसायटी के निदेशक राजेंद्र बंधु ने कहा कि महिला मैकेनिक गैराज की स्थापना के बाद अनुभव आया कि लोगों को दोपहिया वाहनों की मरम्मत व सर्विसिंग के लिए सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने पड़ते हैं, एक बार वाहन छोड़कर जाना पड़ता है। ऐसे में लोग ऐसी व्यवस्था चाहते थे जहां वाहनों की सर्विसिंग और मरम्मत उनके घरों में हो। वहीं महिला दुपहिया वाहन चालकों को भी वाहन की मरम्मत में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर वाहन सड़क पर खराब हो जाता है, तो उसे गैरेज तक ले जाना मुश्किल होता है। यह पोजीशन 'गैरेज ऑन व्हील्स' एक बहुत अच्छा कॉन्सेप्ट है। यदि वाहन सड़क पर खराब जाता है, तो यह 'गैरेज ऑन व्हील्स' आवश्यक स्थान पर पहुंच जाएगा और खराब हुए वाहन की रिपेयरिंग करेंगे।
आपको बता दें कि महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ संध्या व्यास ने कहा कि इंदौर महिला यांत्रिकी और महिला चालकों ने पूरे समाज को एक उम्मीद दिखाई है। उन्होंने कड़ी मेहनत और चुनौतियों का सामना कर रोजगार के एक नए पहलू को जन्म दिया है और यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। कार्यक्रम में इंदौर की 100 से अधिक महिला मैकेनिक और महिला चालकों ने भाग लिया। इस अवसर पर उसी समाज द्वारा प्रशिक्षित महिला चालकों व महिला मैकेनिकों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जब वह मैकेनिक और ड्राइवर की नौकरी के लिए आगे आए तो परिवार और समाज के लोगों ने उन्हें रोका और कहा कि यह नौकरी पुरुषों की है। लेकिन हमने समाज को दिखाया कि महिलाएं भी इस काम को बखूबी कर सकती हैं। महिला यांत्रिकी द्वारा संचालित गैराज ऑन व्हील्स का शुभारंभ भी एक अनूठी पहल है। वाहन मरम्मत के लिए गैरेज होम पर कॉल करने के लिए संगठन द्वारा एक फोन नंबर जारी किया गया है।

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