मद्रास उच्च न्यायालय का अहम फैसला, भले ही माता-पिता भारतीय नागरिकता त्याग दें पर अजन्मा बालक फिर भी नागरिकता का हक़दार

न्यायमूर्ति अनीता सुमंत ने 22 साल के प्रणव श्रीनिवासन की भारतीय नागरिकता की मांग वाली रिट याचिका की अनुमति देते हुए यह फैसला सुनाया

मद्रास उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भले ही माता-पिता अपनी भारतीय नागरिकता को त्याग दें और किसी अन्य देश की नागरिकता का विकल्प चुनें, लेकिन त्याग के समय उनका अजन्मा बच्चा भारतीय नागरिकता का दावा करने का हकदार है। न्यायमूर्ति अनीता सुमंत ने 22 साल के प्रणव श्रीनिवासन की भारतीय नागरिकता की मांग वाली रिट याचिका की अनुमति देते हुए यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के 30 अप्रैल 2019 के याचिका को खारिज करने वाले आदेश को रद्द करने की मांग की। 
आपको बता दें कि याचिकाकर्ता प्रणव श्रीनिवासन के भारतीय नागरिकता वाले माता-पिता ने अपनी नागरिकता त्यागकर दिसंबर 1998 में सिंगापुर की नागरिकता ले ली थी। याचिकाकर्ता उस वक्त अपनी मां के गर्भ में साढ़े सात महीने के भ्रूण के रूप में था। प्रणव का जन्म 1 मार्च 1999 को सिंगापुर में हुआ था और वहां जन्म के आधार पर उन्हें नागरिकता मिल गई थी। प्रणव ने 5 मई 2017 को सिंगापुर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के समक्ष अपनी भारतीय नागरिकता की बहाली की मांग की। याचिकाकर्ता के अनुसार, वह भारतीय नागरिक नहीं रहा, क्योंकि उसके माता-पिता 19 दिसंबर, 1998 को सिंगापुर के नागरिक बन गए थे, उस वक्त हालांकि वह अपनी मां के गर्भ में था। प्रणव ने दलील दी कि क्योंकि उसके माता-पिता और दादा-दादी दोनों जन्म से भारत के नागरिक थे और उसके दादा-दादी आज भी भारतीय नागरिक हैं।
मामले में न्यायाधीश ने प्रणव की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि 19 दिसंबर 1998 को याचिकाकर्ता भ्रूण के रूप में साढ़े सात महीने का था और उसने निश्चित रूप से एक बच्चे का दर्जा हासिल कर लिया था। इस स्थिति में वह अपने माता-पिता की भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार नागरिकता की बहाली के लिए धारा 8 (2) के तहत उपलब्ध सुरक्षा / अधिकार से इनकार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने याचिका को इनकार करने को स्पष्ट भाषा और धारा 8 (2) के स्पष्ट इरादे के विपरीत बताते हुए केंद्रीय मंत्रालय के अस्वीकृति आदेश को रद्द करने का आदेश दिया। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता नागरिकता की बहाली का हकदार है और उसे चार सप्ताह के भीतर नागरिकता का दस्तावेज जारी किया जाएगा।

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