गुजरातः नकारात्मक विचारधारा से बाहर आकर चुस्त, मस्त एवं स्वस्थ बने: अविनाश जोशी

कोरोना मरीजों को सकारात्मक दृष्टिकोण पर बल देते हुए अविनाश जोशी

चिंता न करें, कल का सूरज एक नई रोशनी लेकर आएगा, सकारात्मक दृष्टिकोण ही एक अमूल्य औषधि है: संत त्रिकमदासबापु

    कोरोना महामारी ठीक आज मैंने मानव मन को पराजित होते देखा है। चाहे वायरस मुझे मार डाले या नहीं, मैंने भी एक आदमी को झूठे दहशत से मरते देखा है। हम कोरोना महामारी से निश्चित रूप से छुटकारा पा लेंगे, लेकिन अब हमें इस कमजोरी और चिंता को दूर करने की जरूरत है, जो हमारे मन को भयभीत कर रही है। झूठी चिंताओं या झूठे भय से कुछ नहीं होने वाला है। लेकिन, अगर हम इस समय का सामना साहस और मुस्कुराते हुए करते हैं और आवश्यक देखभाल और ध्यान रखते हैं, तो वास्तव में कल का सूरज एक नई सुबह, एक नई रोशनी और एक नई ऊर्जा के साथ उगेगा।
   संत  त्रिकमदास बापू के साथ-साथ कथाकार  अविनाश जोशी भी इस समय एक महत्वपूर्ण दवा के रूप में सकारात्मक दृष्टिकोण का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हमें नकारात्मक सोच से बाहर आना चाहिए और सावधान व सतर्क रहते हुए  सभी दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। बिना जरुरी बाहर जाने से बचे और अफवाहों पर ध्यान न दें। अगर हम शरीर को स्वस्थ रखते हैं, तो यदि कोरोना हो भी जाये तो  जल्दी से ठीक हो सकता है। हमें अपने मनोबल को मजबूत रखने के लिए अपने बच्चों और परिवार की देखभाल करने की आवश्यकता है, और  स्वस्थ रहकर सकारात्मक सोच को मन में स्थान दें। 
उन्होंने कहा कि अब जब सरकार युवाओं के लिए टीकाकरण शुरू कर रही है, तो प्रत्येक युवा को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए और टीकाकरण करवाना चाहिए, ताकि हम कोरोना को मात दे सकें और कुछ ही समय में हम फिर से अपना सामान्य जीवन जी सकें।

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