गुजरात : एक ही दिन में तीन अलग-अलग शहरों में अंगदान की महक!

अहमदाबाद, जूनागढ़ और वड़ोदरा में ब्रेइनडेड मरीजों के अंगदान के बाद जरूरतमंदों में सफल ट्रांस्प्लांट की कार्रवाई हुई

गुजरात में स्टेट ऑर्गन टिशु एंड ट्रांसपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (सूटो) के तत्वावधान में जरूरतमंद मरीजों के लिए अंगदान का सेवा यज्ञ शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य के विभिन्न अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेज द्वारा पिछले कुछ महीनों से यह सराहनीय कार्य किया जा रहा है। ऐसे ही एक घटनाक्रम में प्रदेश में एक ही दिन में तीन अलग-अलग जगहों पर अंगदान के मामले सामने आए हैं जो निसंदेह प्रशंसनीय है। अंगदान के इस महान सेवा यज्ञ से वर्षों से अंगों की खोज से पीड़ित जरूरतमंद मरीजों को नया जीवनदान मिल रहा है।
25 मई 2022 के दिन अहमदाबाद सिविल अस्पताल में सड़क दुर्घटना के शिकार 50 वर्षीय जसूजी ठाकोर के ब्रेन डेड हो जाने के बाद उनके ह्रदय, दोनों किडनी और लीवर का दान किया गया। इन अंगों का जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपण किया गया। हृदय को ग्रीन कोरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद की सिम्स हॉस्पिटल भेजकर दाखिल मरीज में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया।
अंगदान की दूसरी घटना जूनागढ़ जिले में हुई जहां 66 वर्षीय मगनभाई गजेरा के ब्रेन स्ट्रोक के कारण अस्पताल में भर्ती होने के बाद ब्रेन डेड की स्थिति में उनके परिवारजनों की राजी खुशी से अंग दान किया गया। मगन भाई की दोनों किडनी और लीवर का दान हुआ। इन्हें केशोद से एयर एंबुलेंस के द्वारा अहमदाबाद सिविल मेडिसिन की किडनी इंस्टीट्यूट में प्रत्यारोपण के लिए भेजा गया।
अंगदान की तीसरी घटना वडोदरा के प्रकाश में आई है जहां 17 वर्षीय वृंदा को हाइपरक्सिया हो जाने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित किया। ब्रेन डेड होने के बाद वृंदा के पिता कमलेश भाई पटेल ने अपनी बेटी के अंगों का दान करने का निर्णय किया। हॉस्पिटल प्रशासन द्वारा ब्रांडेड वृंदा के अंगो की रिट्रायबल प्रक्रिया की गई और हृदय, फेफड़े, दोनों किडनी, लीवर, स्वादुपिंड और दोनों कॉर्निया का दान प्राप्त हुआ। हृदय को ग्रीन कॉरिडोर के मार्फत मुंबई के अस्पताल में पहुंचाया गया जबकि फेफड़ों को चेन्नई के अस्पताल में ट्रांसपोर्ट के लिए भेजा गया। महत्वपूर्ण है कि कक्षा 12 विज्ञान प्रवाह में दो विषयों में फेल होने पर नांदेड की रहने वाली छात्रा वृंदा पटेल ने फांसी लगाकर खुदकुशी की थी।
इस प्रकार राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए अंगदान के सेवा यज्ञ में अब लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और जनजागृति भी फैल रही है। जरूरतमंद मरीजों को इसका सीधा लाभ भी मिल रहा है।

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