गुजरात : अहमदाबादी कचौरी ब्वाय अब बनेगा इंजीनियर, साकार होगा तन्मय का सपना

कचौरी ब्वाय अब बनेगा इंजीनिय

दिल्ली के 'बाबा का ढाबा' के चाचा तो आपको याद ही होंगे। कोरोना काल में बेसहारा हुए इस कपल ने लोगों की काफी मदद की। ऐसी ही अहमदाबाद की भी स्टोरी थी, यिद आपको याद हो तो.... अहमदाबाद के मणिनगर रेलवे स्टेशन के बाहर 14 साल के तन्मय की.. जो समोसे और कचौरी बेचकर अपने परिवार की आर्थिक मदद करता था। अहमदाबाद के तन्मय परिवार की मदद के लिए सिर्फ 10 रुपये में कचौरी बेचते हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और वह रातों-रात स्टार बन गए। जिसके बाद कई लोग और सितारे भी तन्मय की मदद के लिए सामने आए।
संघर्षों से भरा रहा जीवन
अहमदाबाद के एक छोटे से इलाके की रहने वाले 14 साल के तन्मय अग्रवाल का जीवन किसी संघर्ष से कम नहीं था। तन्मय का परिवार किराए के घर में रहता है, परिवार की आमदनी दो जून के खाने के लिए पर्याप्त थी, इसलिए तन्मय मणिनगर में समोसा कचौरी बेचकर अपने पिता की आर्थिक मदद करता था। अपने पिता के संघर्ष के दर्द और इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाने के जुनून के बीच तन्मय ने स्कूल के बाद अपने पिता को अपने व्यवसाय में मदद करने का फैसला किया।
तन्मय का इंजीनियर बनने का सपना होगा साकार
कभी आर्थिक तंगी के कारण स्कूल छोड़ने की उनकी बारी थी, तन्मय आज नियमित रूप से ऐप पर गणित और विज्ञान की पढ़ाई करता है और इंजीनियरिंग वीडियो भी देखता है। पारिवारिक कठिनाइयों और पढ़ाई के प्रति तन्मय के समर्पण से प्रेरित, 'बायजूस एजुकेशन फॉर ऑल' पहल उन्हें बायजूस लर्निंग ऐप पर सामग्री तक मुफ्त पहुंच प्रदान करके एक इंजीनियर बनने के सपनों को साकार करने में मदद कर रही है। इस बारे में तन्मय कहते हैं, ''मुझे पढ़ाई करना अच्छा लगता है। गणित और विज्ञान मेरे पसंदीदा विषय हैं और मैं बड़ा होकर इंजीनियर बनना चाहता हूं, मेरे पिता मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं और मैं अपने पिता को एक बेहतर जीवन देना चाहता हूं ताकि उन्हें दोबारा कचौरी न बेचनी पड़े।"
तन्मय ने आगे कहा, "मेरे सपनों को पंख देने के लिए मैं बायजूस का शुक्रगुजार हूं। मैं 10वीं बोर्ड परीक्षा में शीर्ष अंक हासिल करने और आखिरकार कचौरीवाला इंजीनियर बनने की पहचान स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।"

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