कोरोना काल में पतियों आय हुई कम, तो गृहिणियां शेयर बाजार में आजमाने लगीं किस्मत

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

SIP-म्युच्युअल फंड में महिलाओं का निवेश बढ़ा, सीख रहीं शेयर बाजार में निवेश के सिक्रेट्स

कोरोना कॉल में कई लोगों के नौकरी धंधे पर असर पड़ा है। ऐसे में अब गृहणियों ने अब आर्थिक बागडोर संभाली है। कई क्षेत्रों में गृहणियों ने एसआईपी, म्यूचुअल फंड और डायरेक्ट इक्विटी आदि सेक्टर में निवेश करना शुरू किया है। छोटी मोटी बचत से परिवार की मदद करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के नाम पर 4000 करोड़ों रुपए के निवेश में 400 करोड रुपए की बढ़ोतरी हुई है। कोरोना की मुश्किल घड़ी में लोगों की नौकरियां छूट रही है। ऐसे में कई नए निवेशकों ने डायरेक्ट इक्विटी सेक्टर में निवेश किया है। 
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सूरत में महिलाओं का शेयरबाजार में 400 करोड का निवेश बढ़ा : वेल्थ सेक्टर्स के जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार एक ही साल में डाइरेक्ट इक्विटि निवेश क्षेत्र में 30 हजार निवेशक जुड़े हैं। इन निवेशकों में महिलाएं भी बढ़ी है। 2019 में जहां की महिलाओं के नाम पर उनके पति या परिवार के लोग निवेश करते थे अब महिलाएं खुद निवेश कर रही हैं। इस बारे में शहर के वेल्थ एक्सपर्ट जिग्नेश माधवानी ने बताया कि सूरत का कुल मार्केट कैप 21 हजार करोड़ का है। जिसमें की महिलाओं के नाम पर 4000 करोड़ का निवेश होता है। महिला निवेशकों की संख्या बढ़ने से 400 करोड़ का निवेश बढ़ा है। महिलाओं का हिस्सा 3 से 5 प्रतिशत था जो कि 50% और बढ़ गया है अब 10% पर पहुंचा है। इसके लिए कोरोना को जिम्मेदार माना जा रहा है। इक्विटि सेक्टर के साथ एमएफ, एसआईपी सेक्टर में लोगों की पसंदगी बढी है। चार्टर्ड अकाउंटेंट शुभांगी तोसनीवाल ने मीडिया को बताया कि मैंने एसआईपी डायरेक्ट इक्विटी सॉवरेन बॉन्ड सहित सेक्टर में निवेश किया है। 
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महिलाओं में आ रही जागृती के कारण बढा निवेश : महिलाएं आर्थिक तौर से खुद पैरों पर खड़ी हो इसलिए एक प्रोग्राम बनाया है। जिसके अंतर्गत माताओं, बहनों गृहणियों तथा नौकरी पैसे वाली महिलाओं को निवेश संबंधित जानकारी दी जाती है। सीएफए भाग्यश्री साबू का कहना है कि महिलाओं को आर्थिक तौर से आत्मनिर्भरता दिलाने के लिए उन्होंने ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया था जो कि अभी भी चल रहा है। हमारे साथ जुड़े कई महिलाओं ने म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार में निवेश किया है। वराछा बैंक के पूर्व चेयरमैन कानजी भालाणा का कहना है कि वर्ष 2008 की मंदी के बाद सौराष्ट्र बाहुल्य क्षेत्रों में महिलाएं 5000 से 10000 तक की एसआईपी और डिपाजिट में निवेश करना शुरू किया है। हमारी बैंक में ही हैंडलूम से जुड़ी हुई एक महिला 30000 का निवेश करती है। फाइनेंसियल साक्षरता बड़े तो महिलाओं का निवेश भी बढ़ेगा।

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