बिहार : सामने आया अनोखा मामला, कक्षा में नहीं आ रहे थे छात्र तो प्रोफेसर ने लौटाई 33 महीने की पगार

बिहार के बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के नीतीशवार सिंह कॉलेज में कार्यरत सहायक प्रोफेसर ललन कुमार ने लौटाए 23 लाख रुपये, रजिस्ट्रार ने नहीं स्वीकार किया उनका आवेदन, वापस किया उनका चेक

पढ़ाई के मामले में बिहार ऐसे तो बहुत बदनाम है पर इसके बाद भी हर साल बहुत से मेधावी छात्र अपनी विषम परिस्थितयों से ऊपर उठकर समाज का नाम रोशन करते है। यूपीएससी की परीक्षा को या आईआईटी की प्रवेश परीक्षा बिहार के छात्र हर जगह अपनी छाप छोड़ते नजर आते है। अब बिहार के एक प्रोफेसर ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। सरकारी स्कूलों-कॉलेजों के शिक्षकों पर अक्सर बच्चों को नहीं पढ़ाने और सरकारी तनख्वाह लेने के आरोप लगते रहते हैं। ऐसे दौर में मुजफ्फरपुर में नीतीश्वर कॉलेज के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने नैतिकता की अनूठी मिसाल पेश की है।  बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के नीतीशवार सिंह कॉलेज में कार्यरत सहायक प्रोफेसर ललन कुमार ने दो साल नौ महीने के वेतन के 23 लाख रुपये कॉलेज प्रशासन को लौटा दिए। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उस कॉलेज में छात्र पढ़ने ही नहीं आते। उनके मुताबिक वह एमए के छात्रों को पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन छात्र नहीं आते। उसकी पढ़ाई बेकार जा रही है इसलिए उसने यह कदम उठाया है।
आपको बता दें कि ललन कुमार ने मंगलवार को 23 लाख रुपये का चेक लिया और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से संपर्क किया और उनसे राशि वापस लेने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि जब छात्र पढ़ने नहीं आते हैं तो सैलरी कैसे ले सकते हैं? हालांकि, रजिस्ट्रार ने उनका आवेदन अस्वीकार करते हुए उनका चेक उन्हें वापस कर दिया। मुजफ्फरपुर के नीतीशवार सिंह कॉलेज के सहायक प्रोफेसर ललन कुमार ने कुलपति को लिखे पत्र में कहा कि वह एमए के छात्रों की कक्षाएं लेना चाहते थे, लेकिन छात्र नहीं आए। उन्होंने कुलपति से उन्हें आरडीएस या एमडीडीएम कॉलेज में स्थानांतरित करने का भी अनुरोध किया। उनके आवेदन पर अभी तक विश्वविद्यालय की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है।
पत्र की प्रतियां उन्होंने कुलपति, कुलाधिपति, मुख्यमंत्री से लेकर यूजीसी, पीएमओ और राष्ट्रपति को भी भेजी है। कुलसचिव डॉ. ठाकुर ने पहले उनका चेक लेने से इन्कार करते हुए इसके बदले उन्हें नौकरी छोड़ने को कहा, लेकिन उनकी जिद थी कि उनका तबादला कर दिया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
बीआर बिहार विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सहायक प्रोफेसर ललन कुमार द्वारा वेतन वापसी के संबंध में प्रोफेसर राम कृष्ण ठाकुर ने कहा कि ललन कुमार 23 लाख रुपये का चेक लाए थे। विश्वविद्यालय को पैसा वापस लेने की कोई परंपरा नहीं है। उन्हें समझाने के बाद वापस भेज दिया गया है। इस मामले में कॉलेज प्राचार्य से बात की जाएगी। बीआर बिहार विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ आर के ठाकुर ने कहा कि वह जिस कॉलेज में काम करते हैं, उसके प्रिंसिपल ने कहा कि उन्होंने हमारी जानकारी के बिना सीधे विश्वविद्यालय में आवेदन किया था। अगर उन्हें कोई समस्या थी तो उन्हें इसे प्राचार्य के सामने रखना चाहिए था। कॉलेज प्रशासन की दलीलों के बीच इस मामले पर बिहार में जोरदार बहस हो रही है। लोग ना सिर्फ प्रोफेसर की तारीफ कर रहे है बल्कि छात्रों को उनकी लापरवाही के लिए लताड़ भी रहे है।

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