अहमदाबाद : इलाज के अभाव में बहन की कोरोना से मौत के बाद भाई ने अस्पताल के VIP कल्चर की ऐसे खोली पोल!

प्रशासन का अमानवीय चेहरा ; 30 घंटों तक नहीं आई 108, इलाज के अभाव में हुई महिला की मौत

गुजरात राज्य में तूफ़ान की रफ़्तार से बढ़ रहे संक्रमण ने हालात गंभीर बना रखा है। संक्रमित मामलों के साथ साथ मरने वालों की संख्या में भी तेजी देखी जा रही है। आम आदमी बेड, ऑक्सीजन और आवश्यक दवाइयों के आभाव में अपने संक्रमित परिजनों को मरते हुए देखने को मजबूर है। ऐसे में एलजी अस्पताल में एक पूर्व लैब कर्मचारी की बहन के साथ घटी एक घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। गुजरात में अब तक ये नियम था कि निजी वाहन से आने वाले मरीजों को अस्पताल में प्रवेश नहीं मिल रहा था। जो मरीज 108 से आते है उन्हें ही अस्पताल प्रशासन भर्ती करता है और उसका इलाज करता है। ऐसे में 108 के लिए लम्बी वेटिंग देखी जा रही है। ऐसे में एलजी अस्पताल ने निजी वाहन से आए एक मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया।
वहीं दूसरी ओर 108 में लम्बी वेटिंग के कारण 30 घंटे तक 108 उपलब्ध नहीं हो सकी और 30 घंटे तक इलाज नहीं होने से महिला की ही मौत हो गई। मरीज और उसके भाई ने एलजी, एसवीपी, जीसीएस अस्पताल प्रशासन से इलाज के लिए आग्रह किया लेकिन किसी ने मदद नहीं की। आखिरकार बहन की मौत हो गई और इसके बाद बहन के अंतिम संस्कार के बाद भाई एक लक्जरी कार में आया और एलजी अस्पताल में भर्ती मरीजों के वीडियो बना कर अस्पताल के वीआईपी कल्चर की पोलखोल दी।
आपको बता दें कि गीता मंदिर इलाके में रहने वाले मनीषभाई एलजी अस्पताल में लैब अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे। वर्तमान में उनकी नौकरी को लेकर अदालत में मामला लंबित है। मनीषभाई की ममेरी बहन(मामा की लड़की) हेतल अशोक लोढ़ा (उम्र 31) अपने मायके गीता मंदिर में रहने आई थी जहाँ वो कोरोना से संक्रमित हो गई। दो बच्चों की मां हेतल का घर में ही इलाज चल रहा था और 24 को घर में चल रहे इलाज के दौरान उनका ऑक्सीजन स्तर कम हो गया। ऐसे में भाई मनीष ने अपनी बहन हेतल को अस्पताल में एडमिट कराने के लिए एलजी अस्पताल में बात किया तो उन्हें जवाब मिला कि यदि वो 108 एम्बुलेंस में आते हैं तो ही उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। मनीषभाई ने १०८को कॉल करके रजिस्ट्रेशन किया और उन्हें बताया गया कि जल्द ही एम्बुलेंस आ जाएगी। वहीं दूसरी ओर, हेतल का ऑक्सीजन स्तर 50 से 40 हो गया है। मनीष ने ऑक्सीजन की बोतल ब्लैक में खरीदकर अपनी बहन को बचाने की कोशिश की। इस बीच, मनीषभाई ने एलजी, एसवीपी और जीसीएस अस्पताल के प्रशासकों से अपनी बहन के इलाज के लिए मदद मांगी लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। वहीं 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद बाद भी 108 उपलब्ध नहीं हुई थी।
दुसरे दिन दोपहर 3 बजे यानि पहली बार कॉल करके रजिस्ट्रेशन कराने के लगभग 28 घंटे के बाद जब 108 को कॉल किया गया तो जवाब मिला कि एम्बुलेंस को आने में एक से 2 घंटे लग जाएंगे। समय बीतने के साथ साथ आखिरकार हेतलबेन की शाम को इलाज के आभाव में घर पर ही मृत्यु हो गई। अपनी बहन के अंतिम संस्कार के बाद, मनीषभाई ने वीआइपीयों को 108 एम्बुलेंस के बिना अस्पताल में भर्ती किया जा रहा ऐसे कोविड रोगियों का वीडियो बनाया। 
अस्पतालों के वीआईपी कल्चर की पोल खोलने के बाद मृतक हेतल लोढ़ा के भाई मनीषभाई ने कहा कि केवल गरीबों मरीजों को ही भर्ती होने के लिए 108 एम्बुलेंस में आने का कानून लागू करने से प्रशासकों ने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया और वीआइपी लोगों को बिना किसी नियम के प्रवेश दिया जा रहा है। प्रशासन ने हमारे साथ अन्याय किया है।

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