श्मशान में अंतिम संस्कार से ऐन पहले महिला की आंखें खुलीं और रोने लगी, परिजन आनन-फानन में अस्पताल ले गये!

प्रतिकात्मक तस्वीर

कोरोना संक्रमण काल में देश के हर कोने से मौतों की खबरें आ रही हैं। पिछले चंद दिनों से हालांकि कोरोना के हालात कुछ ठीक हुए हैं, लेकिन कुछ सप्ताहों पहले की बात करें तो हालात ये थे कि न अस्पतालों में मरीजों को जगह मिल रही थी, और न श्मशान में मृतकों को। खैर, इसी क्रम में एक चौंकाने वाली खबर महाराष्ट्र से आ रही है। यहां एक महिला की मौत के बाद उसे श्मशान में अंतिम संस्कार के लिये ले जाया गया तो अग्निदाह से एन पहले महिला जिंदा हो गई। 
इस आश्चर्यजनक घटना के संबंध में इंडियाटाइम्स.कॉम में छपी खबर के मुताबिक मामला महाराष्ट्र के बारामती तकसील के मुढाले गांव का है। गांव की शकुंतला गायवाड़ नामक महिला कोरोना संक्रमित हो गई थी और उन्होंने खुद को घर पर आईसोलेट कर लिया था। रिपोर्ट के अनुसार उनकी तबियत बिगड़ने पर उन्हें 10 मई को अस्पताल में भर्ती कराने के लिये एम्ब्यूलेंस में लेटाया गया। परिजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में बेड की खोज कर रहे थे, उसी दौरान वे बेहोश हो गईं। एम्ब्यूलैंस के स्टाफ ने महिला को मृत घोषित कर दिया और परिजन उन्हें फिर गांव ले गये और वहां से उन्हें अंतिम संस्कार के लिये श्मशान ले जाया गया। 
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लेकिन सभी के आश्चर्य के बीच अंतिम संस्कार के ठीक पहले महिला को होश आ गया और उन्होंने अपनी आंखें खोल दीं और रोने लगी। परिजनों उन्हें तुरंत बारामती के सिल्वर ज्युबिली हॉस्पीटल ले गये और उनका इलाज शुरू किया गया। 
इस मामले में संभव है कि एम्ब्यूलेंस में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने बेहोश महिला को मृत मान लिया हो। ठीक ऐसा ही मामला विगत दिनों मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले से भी सामने आया था जहां एक युवक श्मशान में अंतिम संस्कार से ठीक पहले बैठा हो गया। परिजन उसे फिर अस्पताल ले गये लेकिन डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में फिर मृत घोषित किया था। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरहवाही का आरोप लगाया था, जिसे अस्पताल ने खारिज कर दिया था।

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