कोरोना से ठीक होने के बाद दांतों में दर्द को हलके में ना लें, कहीं आधा जबड़ा न ‌निकालना पड़ जाए!

डॉ. ऋषि भट्ट (मेक्सिलोफेश्यिल सर्जन )

म्युकर मायकोसिस साइनस से शुरु होकर चेहरे के निचले हिस्से को प्रभावित करता चला जाता है, जानें डॉ. ऋषि भट्ट की क्या है सलाह

कोरोना की दूसरी लहर देश भर में कहर बरपा रही है। गुजरात में भी इस बार कई लोगों ने इस लहर में जान खोई। सूरत की बात करें तो, यहां कोरोना के हालिया संकट में शहर की चिकित्सा व्यवस्था जिस प्रकार चरमराई थी ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ था। मरीजों को न अस्पताल में बिस्तर मिले, न दवाई और न इंजेक्शन। यहां तक कि एम्ब्यूलेंस या मौत के बाद श्मशान गृह में समय पर अंतिम संस्कार की सुविधा ही नसीब हो पाई। खैर, अब हालात कुछ हद तक सुधरते दिख रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक नये प्रकार का जोखिम सामने आया है।
जी हां, देखा गया है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों में म्युकर मायकोसिस नामक बीमारी घर कर रही है। सूरत सहित प्रदेश भर में मामले इतनी अधिक मात्रा में प्रकाश में आये हैं कि राज्य सरकार ने सिविल अस्पताल में इस बीमारी के इलाज के लिये अलग से वॉर्ड तक खोल डाला है। जहां तक म्युकर मायकोसिस का संबंध है, यह एक प्रकार की फंगस होती है जो मरीज के नाक में साइनस के आसपास से बढ़ना शुरु होती है और अंदरूनी रूप से बढ़ती हुई नाक, आंख, दांत और गले से होकर फेफड़ों तक को अपनी चपेट में ले रही है। कोरोना की पहली लहर के बाद भी म्युकर मायकोसिस के मामले सामने आये थे, लेकिन उस समय बीमारी की भयावहता अधिक नहीं दिखी थी। लेकिन कोरोना की वर्तमान लहर में म्युकर मायकोसिस ने स्वयं डॉक्टरों को आश्चर्यचकित कर दिया है। 
आम तौर पर यह धारणा है कि म्युकर मायकोसिस की पहली क्षति मरीज की आंखों पर पहुंचती है और रोगी की आंखें निकालने तक की नौबत आ जाती है। लेकिन अब नई बात सामने आई है। म्युकर मायकोसिस का असर दांतों पर भी होता है जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
सूरत शहर के मेक्सिलोफेश्यिल सर्जन डॉ. ऋषि भट्ट ने लोकतेज को बताया कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों को दांद में दर्द की शिकायतें सामने आ रही हैं। रोगियों को इसके बिलकुल भी हलके में नहीं लेना चाहिये। वरना यदि हालात गंभीर हो गये तो मरीज की जान बचाने के लिये उसका जबड़े के ऊपरी हिस्से को निकालना भी पड़ सकता है। 
डॉ. भट्ट ने बताया कि हाल ही में उनके एक पेशंट को इसी प्रकार की शिकायत थी और उनका आधा जबड़ा निकालना पड़ गया। उनके अनुसार म्युकर मायकोसिस  की शुरुआत साइनस क्षेत्र से होती हुई चेहरे के निचले हिस्से की ओर बढ़ती है। इससे मरीज को दांतों में दर्द होने लगता है और काफी अल्प समयावधि में दांत हिलने तक लग जाते हैं। जब तक मरीज डॉक्टर को दिखाते हैं तब तक देर हो चुकी होती है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों में कोविड से ठीक हुए तीन मरीज दांतों में दर्द की शिकायत के साथ उनके पास पहुंचे जिनक सीटी स्केन रिपोर्ट से तो कुछ पता नहीं चला लेकिन बायोप्सी करवाने पर म्युकर मायकोसिस कन्फर्म हुआ। वरिष्ठ इएनटी सर्जन की सलाह पर इनमें से एक मरीज के ऊपरी जबड़े को निकाल देना पड़ा।
कोरोना वायरस पॉजीटीव मरीज के इलाज के दौरान बीमारी शरीर के विभिन्न अंगों को जहां प्रभावित करती है, वहीं कोरोना से ठीक हुए मरीजों भी सावधानी बरतने की अत्यंत आवश्यकता है। विशेष रूप से म्युकर मायकोसिस के लक्षणों पर नजर रखना, वरना आंखों की रोशनी जाना, आंखें निकालने की नौबत आता, दांतों में दर्द, दांतों का टूटना और जबड़े तक को हटाने की स्थिति पैदा हो सकती है। ये सारे चिकित्सकीय निर्णय मरीज की जान बचाने के उद्देश्य से विशेषज्ञों को लेने पड़ते हैं। लेकिन शरीर के इन महत्वपूर्ण अंगों के बिना मरीज का शेष जीवन लाचारी पूर्ण बन सकता है। इसलिये सतर्क रहने में ही समझदारी है।

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