देश के पहले वैदिक शिक्षा बोर्ड के गठन को मिली मंजूरी, पतंजलि करेगी निगरानी


वैदिक शिक्षा के लिए देश का पहला स्कूल बोर्ड स्थापित करने के लिए योग गुरु रामदेव के पतंजलि योगपीठ को आधिकारिक रूप से चुना है।
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नई दिल्ली। महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान (एमएसआरवीवीपी) की कार्यपरिषद ने वैदिक शिक्षा के लिए देश का पहला स्कूल बोर्ड स्थापित करने के लिए योग गुरु रामदेव के पतंजलि योगपीठ को आधिकारिक रूप से चुना है। भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस वैदिक यूनिवर्सिटी का संचालन रामदेव की कंपनी पतंजलि की ओर से किया जाएगा। पतंजलि योगपीठ के चयन के साथ, बीएसबी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होने वाला पहला निजी स्कूल बोर्ड होगा। वहीं किसी भी स्कूल में बोर्ड की तरह, बीएसबी सेलेबस का मसौदा तैयार करेगा, वहीं परीक्षा आयोजित की जाएगी और एफिलिएटेड स्कूलों को प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। हालांकि, केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता वाली एमएसआरवीवीपी गवर्निंग काऊंसिल ने यह भी निर्णय लिया कि पतंजलि की ओर से संचालित बीएसबी वैदिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षा के लिए एफिलिएटेड स्कूलों पेश करेगा।

11 फरवरी को एमएसआरवीवीपी की ओर से जारी किए गए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) के अनुसार, बीएसबी का अर्थ था वैदिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, शिक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय पारंपरिक ज्ञान, भारतीय कला और भारतीय परंपरा और संस्कृत जैसे पारंपरिक ज्ञान प्राप्त करना है। गौरतलब है कि सन 2015 में योग गुरु रामदेव ने सरकार को वैदिक शिक्षा के लिए एक स्कूल बोर्ड स्थापित करने के लिए प्रेरित किया था, लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसके लिए मना कर दिया था। उसके बाद 2016 में स्मृति ईरानी ने वेद विद्या के इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था।

– ईएमएस