CBI के शीर्ष अधिकारी राकेश अस्थाना पर रिश्वल लेने का आरोप, आस्थाना ने कहा – उन्हें फंसाया जा रहा


सीबीआई अफसर राकेश अस्थाना ने मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ मामले में ३ करोड़ रुपये रिश्वत लेने के आरोप को नकारते हुए उन्हें फंसाने की बात कही।
(File Photo: IANS)

नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के वरिष्ठ अधिकारी राकेश अस्थाना पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। हैदराबाद के उद्योगपति सतीश बाबू सना की शिकायत के आधार पर सीबीआई के दूसरे नंबर के अधिकारी राकेश अस्थाना पर दर्ज एफआईआर में इस बात का दावा किया गया है कि उन्होंने सीबीआई स्पेशल डायरेक्टर को पिछले वर्ष लगभग तीन करोड़ रुपये दिए थे। ज्ञात हो कि अस्थाना पर आरोप है कि वह जिस मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ एक मामले की जांच कर रहे थे, उससे उन्होंने रिश्वत ली।

गौरतलब है कि मोइन कुरैशी से 50 लाख रुपये लेने के मामले में सना भी जांच के घेरे में था, इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व अस्थाना कर रहे थे। दावा किया गया है कि पिछले वर्ष डीएसपी देवेंद्र कुमार द्वारा की गई पूछताछ में दुबई के एक इन्वेस्टमेंट बैंकर मनोज प्रसाद ने उन्हें सीबीआई से उनके अच्छे संबंधों के बारे में बताया। यही नहीं, इस मामले में यह भी बताया गया कि उनका भाई सोमेश उसकी इस केस से बाहर निकलने में मदद करेगा। सना ने कहा कि वह मनोज को लगभग दस वर्षों से ज्यादा वक्त से जानता है।

गौरतलब है कि मनोज को एफआईआर दर्ज होने के अगले ही दिन यानी 16 अक्टूबर को सीबीआई के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। सीबीआई से की गई अपनी शिकायत में सना ने दावा किया है कि मनोज ने उसका नाम हटवाने के एवज में सीबीआई ऑफिसर को देने के लिए पांच करोड़ रुपये मांगे थे। उसने बताया कि तीन करोड़ रुपये दिए जा चुके थे जबकि दो करोड़ रुपये चार्जशीट फाइल करते वक्त उसे क्लीन चिट दिए जाने के साथ ही अदा करने पर बात हुई थी।

सना का यह बयान सीआरपीसी की धारा 164 के अंतर्गत मैजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया गया, जो कि कोर्ट में भी मान्य होगा। सना ने अपनी शिकायत में कहा (जो कि सीबीआई की एफआईआर का हिस्सा है), सोमेश ने मुझे बताया कि राकेश अस्थाना मेरे सीबीआई केस का ध्यान रखेंगे, जिसके एवज में पांच करोड़ रुपये में पहले ही सहमति दी जा चुकी थी। जब मैं दुबई में सोमेश से मिला तो बातचीत के दौरान उसने कहा कि अस्थाना इस काम को निश्चित तौर पर करेंगे क्योंकि उसने पिछले कई वर्षों में उनके दुबई और लंदन में इन्वेस्टमेंट को मैनेज किया है। उसने यह भी जानकारी दी कि अस्थाना पिछले वर्ष लंदन स्थित उसके आवास में रुके थे।

सना ने यह भी दावा किया कि उसने सीबीआई अफसर की फोटो सोमेश के वॉट्सऐप पर देखी है और उनकी पहचान अस्थाना के रूप में की थी। सतीश बाबू सना ने बताया कि उसने मनोज को दुबई में एक करोड़ रुपये पहली किश्त के रूप में दिए थे। 1।95 करोड़ रुपये मनोज के जानने वाले सुनील मित्तल को 12 दिसंबर 2017 को दिल्ली में रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की पार्किंग में दिए थे। सतीश बाबू सना के मुताबिक, जब वह पिछले वर्ष दुबई में था तो सोमेश ने दो सीबीआई अफसरों की फोन पर बातचीत को सुनाया था जब वे उसके मामले को लेकर बात कर रहे थे। हालांकि, उसकी शिकायत में इस बात का जिक्र कहीं भी नहीं है कि उसने अस्थाना को कभी देखा या उनसे खुद बातचीत की। उसकी शिकायत में अस्थाना से मीटिंग या बातचीत को लेकर भी कुछ नहीं कहा गया है।

राकेश अस्थाना ने सीवीसी को लिखा पत्र, सीबीआई निदेशक पर लगाया फंसाने का आरोप

उधर अस्थाना ने सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (सीवीसी) को पत्र लिखकर सीबीआई डायरेक्टर पर फंसाने की साजिश का आरोप लगाया था। पत्र में उन्होंने लिखा था कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने ऐंटी करप्शन ब्रांच में दायर केस में उन्हें फंसाने के लिए जान-बूझकर ऐसे अधिकारी की नियुक्ति की है जिनकी छवि बेदाग नहीं है। उन्होंने लिखा कि सीबीआई चीफ उन्हें फंसा रहे हैं।

अस्थाना ने यह भी आरोप लगाया था कि जांच टीम में अजय बस्सी को साजिशन नियुक्त किया गया है। पत्र में बस्सी के बारे में अस्थाना ने लिखा कि उनकी छवि संदिग्ध है और वह नियम तोड़ने के लिए कुख्यात हैं। 15 अक्टूबर को सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर ने सीवीसी को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी और उनके परिवार के लोगों की कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं। बस्सी, अश्विनी गुप्ता और स्टाफ ऑफिसर और अडिशनल डायरेक्टर एके शर्मा दबाव में उन्हें फंसाने के लिए काम कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार अस्थाना ने पत्र में लिखा था कि ये तीनों अधिकारी दबाव में हैं। 5000 करोड़ के स्टरलिंग बायोटेक केस में उनकी किसी भी तरह की भूमिका की जांच के लिए इन्हें नियुक्त किया गया। उनके मातहत अधिकारी जो लगातार उनके साथ केस के कारण संपर्क में थे, उसका अचानक ही तबादला कर दिया गया।

अस्थाना ने सीवीसी को बताया कि गुजरात काडर के वर्मा और शर्मा ने वडोदरा, सूरत और अमहदाबाद में टीम भेजी ताकि उन्हें फंसाया जा सके और उनकी प्रतिष्ठा को चोट पहुंचा सके। सीवीसी और केंद्र सरकार सचिव को लिखे पत्र में भी उन्होंने दावा किया था कि वह सना को गिरफ्तार करना चाहते थे, लेकिन वर्मा ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया। सतीश बाबू सना पर आरोप है कि उसने राकेश अस्थाना को 3 करोड़ की रिश्वत दी थी।