सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर : सीबीआई कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी


सोहराबुद्दीन शेख- तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को शुक्रवार को बरी कर दिया है।
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13 साल बाद आया फैसला

नई दिल्ली । सोहराबुद्दीन शेख- तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को शुक्रवार को बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार और एजेंसियों ने इस केस की जांच करने में काफी मेहनत की, 210 गवाहों को पेश किया गया, लेकिन मामले से जुड़े कोई भी सबूत सामने नहीं आ सके। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि साजिश और हत्या साबित करने के लिए मौजूद सभी गवाह और प्रमाण संतोषजनक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसमें अभियोजन पक्ष की गलती नहीं है कि गवाहों ने कुछ नहीं बताया। कोर्ट ने इसी के साथ सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ (एनकाउंटर) मामले में 13 साल बाद फैसला आया है।

वर्ष 2005 के इस मामले में 22 लोग मुकदमे का सामना कर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं। यहां की एक विशेष सीबीआई अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले पर विशेष निगाह रही है क्योंकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आरोपियों में शामिल थे। हालांकि, उन्हें 2014 में आरोप मुक्त कर दिया गया था। अमित शाह इन घटनाओं के वक्त गुजरात के गृहमंत्री थे। इस महीने की शुरूआत में आखिरी दलीलें पूरी किए जाने के बाद सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश एसजे शर्मा ने कहा था कि वह 21 दिसंबर को फैसला सुनाएंगे।

इस बहुचर्चित मामले में ज्यादातर आरोपी गुजरात और राजस्थान के कनिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारी हैं। अदालत ने सीबीआई के आरोपपत्र में नामजद 38 लोगों में 16 को सबूत के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया है। इनमें अमित शाह, राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पी सी पांडे और गुजरात पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंजारा शामिल हैं। सीबीआई के मुताबिक आतंकवादियों से संबंध रखने वाला कथित गैंगेस्टर शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने एक बस से उस वक्त अगवा कर लिया था, जब वे लोग 22 और 23 नवंबर 2005 की दरमियानी रात हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे। सीबीआई के मुताबिक शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई। उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मारकर उसका शव को ठिकाने लगा दिया गया।

साल भर बाद 27 दिसंबर 2006 को प्रजापति की गुजरात और राजस्थान पुलिस ने गुजरात- राजस्थान सीमा के पास चापरी में कथित फर्जी मुठभेड़ में गोली मारकर हत्या कर दी। इस बीच,बुधवार को अभियोजन के दो गवाहों ने अदालत से दरख्वास्त की कि उनसे फिर से पूछताछ की जाए। इनमें से एक का नाम आजम खान है और वह शेख का सहयोगी था। उसने अपनी याचिका में दावा किया है कि शेख पर कथित तौर पर गोली चलाने वाले आरोपी एवं पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान ने उस धमकी दी थी कि यदि उसने मुंह खोला तो उस झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा। एक अन्य गवाह एक पेट्रोल पंप का मालिक महेंद्र जाला है।

– ईएमएस