भारत में सार्वजनिक जगहों पर बुर्के पर प्रतिबंध की शिवसेना की मांग


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शिवसेना ने भारत में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में इस संबंध में प्रकाशित संपादकीय में श्रीलंका के राष्ट्रपति के उस फैसले का स्वागत किया गया है जिसमें उन्होंने समग्र श्रीलंका में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनने पर पाबंदी लगा दी है।

संपादकीय में न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रे‌लिया और ब्रिटन का भी उल्लेख है जहां सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनने की इजाजत नहीं है। अब हमारे पड़ोस के देश तक ने आतंकवादी घटना के बाद यह कठोर निर्णय लिया है। संपादकीय में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान किया गया है कि वे भी प्रवर्तमान हालातों और आतंकवाद के बढ़ते व्याप को ध्यान में रखते हुए भारत में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनने पर रोक लगाने का कठोर निर्णय लेने की हिम्मत करें।

संपादकीय में मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ कुरान का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस्लाम में कहीं इस बात की अनिवार्यता नहीं दर्शायी गई है कि मुस्लिम महिलाओं को बुर्का पहना ही है। यह तो केवल मुस्लिम लोगों की मान्यता व सोच ही है कि बुर्का पहनना अनिवार्य है, बाकी धार्मिक रूप से यह अनिवार्य कतई नहीं है।

शिवसेना की इस मांग के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा उठना तो लाजिमी है। किंतु चुंकि फिलहाल कुछ राज्यों में लोकसभा चुनाव होना शेष है, शायद ही होई राजनीतिक दल इस मसले पर खुलकर बहस करे। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि बुर्के पर प्रतिबंध से आतंकवाद के निवारण में कितनी मदद मिल सकती है।

दूसरा एक अहम मुद्दा यह है कि जहां मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहनकर घरों से बाहर निकलती हैं, वहीं कई धर्मों, समाजों में अभी भी पर्दा प्रथा कायम है, जहां महिलाएं घूंघट ओढ़ती हैं। युवतियां दुपहिया वाहन चलाते हुए अपना मुंह दुपट्टे से ढककर चलती हैं। जब बुर्के पर रोक की बात आयेगी तो इन तमाम मुद्दों पर भी बात होगी।

देखना होगा यह मुद्दा वर्तमान चुनावी मौसम में तुल पकड़ता है या ठंडे बस्ते में समा जाता है।