एससी/एसटी एक्ट पर सवर्ण संगठनों के भारत बंद का बड़ा असर


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बिहार में रेल जाम, यूपी में आगजनी, मध्यप्रदेश 18 जिलों में धारा 144

नई दिल्ली । अनुसूचित जाति – जन जाति कानून में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किये गए संशोधन प्रावधानों से असहमति के बाद गुरुवार को सवर्ण संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। भारत बंद के तहत कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है। बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के कई इलाके से इस बंद के चलते प्रभावित हैं।

बिहार में सबसे ज्यादा असर

बिहार के भी कई जिलों में इस बंद का असर देखने को मिल रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों ने अरवल मोड़ के समीप एनएच-83 और एनएच-110 को जाम कर दिया है. बंद का सबसे ज्यादा असर बिहार में देखा जा रहा है। बिहार के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं। ट्रेनों के साथ सड़कों पर चक्का जाम किया गया है। बिहार के आरा जिले के रेलवे स्टेशन में सवर्णों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। तो वहीं मधुबनी में नेशनल हाइवे 105 को आंदोलनकारियों ने जाम कर दिया। लंबा जाम लगने की वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा नेशनल हाइवे 31 को भी जाम करके आंदोलनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। सीतामढ़ी में भी दरभंगा-रक्सौल ट्रेन रोकने का मामला सामने आया है। इसके अलावा नालंदा में आगजनी की घटनाएं हो रही हैं। छपरा के भिखारी ठाकुर चौक को भी आंदोलनकारियों ने जाम कर दिया और सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में छतरपुर, शिवपुरी, भिंड, अशोकनगर, गुना, ग्वालियर आदि स्थानों पर धारा 144 लागू कर दी गई है। वहीं पुलिस बल भी सतर्क है। गुरुवार को भोपाल में ब्राम्हण समाज और करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने चूड़ी और सिंदूर के साथ बीजेपी सांसद प्रह्ललाद सिंह पटेल का विरोध किया। वहीं इंदौर में भी कार्यकर्ता सड़क पर आ गए। वहीं मध्य प्रदेश में स्कूल-कॉलेज और पेट्रोल पंपों को दिनभर के लिए बंद रखा गया है। इससे लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्थान

राजस्थान के कई जिलों में भी बंद के मद्देनजर अलर्ट जारी किया गया है। सवाई माधोपुर में बुधवार रात से धारा 144 लागू कर दी गई गई स्पेशल डीजी (लॉ ऐंड ऑर्डर) एआरके रेड्डी ने बताया कि सभी जिलों से एसपी के साथ बुधवार को मीटिंग की गई। उन्होंने बताया कि इसी साल 2 अप्रैल को जिन जिलों में हिंसा हुई थी उसे देखते हुए सीकर, अलवर, करौली और गंगापुर में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि 10 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा करौली जिले के हिंदुआं में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं जहां अप्रैल महीने में हिंसा की खबरें सामने आई थीं।

उत्तरप्रदेश

वहीं उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में भी एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव को लेकर प्रदर्शन किया गया। लोगों ने पुतले जलाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

एससी-एसटी ऐक्ट पर विवाद

दरअसल ये पूरा विवाद उस एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर है, जिसमें मोदी सरकार ने संशोधन करते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था। एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18ए को जोड़ते हुए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा। इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए सभी प्रावधान रद्द हो जाएंगे। अब सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद इस मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने संसोधन में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इसके अलावा सरकार द्वारा किए गए संसोधन में आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं मिलेगी, बल्कि हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत की मंजूरी दी थी।

इसके बाद पूरे देश में दलित संगठनों ने अप्रैल महीने में बंद का आवाहन कर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान जगह-जगह हिंसा की खबरें आई थीं और कई लोगों की मौत भी हुई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी या यूं कहें कि बवाल, हिंसा और आगजनी के चलते पूरे देश में एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर उबाल को देखते हुए केंद्र सरकार को संसोधन करना पड़ा।

भाजपा में एक-जुटता का अभाव

सत्तारूढ़ भाजपा एससी-एसटी एक्ट को लेकर एक जुट नहीं दिख रही हैं। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने कल कानून पर निजी राय रखते हुए कहा कि जमीन पर एससी-एसटी एक्ट का दुरूपयोग हो रहा है। इससे लोगों के अंदर असमानता का भाव पैदा हो रहा है। अधिकारी भी डर रहे हैं कि अगर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो कार्यवाही हो जाएगी। फर्जी मुकदमों में लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ”पक्ष और विपक्ष का मुद्दा नहीं है, कानून के दुरुपयोग को रोकने के पक्ष में हूं मैं, सभी दल के नेता अपने यहां के फीडबैक को लें, सभी दल समाधान को लेकर विचार करें।”

एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ भाजपा के भीतर उठ रही आवाज पर पार्टी ने सफाई दी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री और भाजपा नेता विजय सांपला ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी राय मायने नहीं रखती है। उन्होंने कहा, ”बयान उनकी निजी राय हो सकती है। संसद में सभी ने कानून के समर्थन में वोट किया। जब संसद ने बिल पास किया है तो किसी की निजी राय कोई मायने नहीं रखती है।”

वहीं मोदी सरकार में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। साथ ही बिल पास कराने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा कि” यह कोई नया कानून नहीं है पुराना कानून है। चुनाव के मद्देनजर करवाया जा रहा है। एलजेपी सवर्ण गरीबों के लिए भी 15 प्रतिशत आरक्षण की मांग करती आई है।”