पीएम मोदी ने किया विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ का लोकार्पण


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का आज राष्ट्र को समर्पित की गई|
  • करोड़ों भारतीयों के सम्मान और सामर्थ्य का प्रतीक है यह प्रतिमा
  • सरदार के प्रण, प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का प्रगटीकरण है

 

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रद्धासुमन समर्पित किए|

केवडिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नर्मदा नदी के तट पर विध्यांचल-सतपुड़ा की पर्वत मालाओं के सान्निध्य में गुजरात की केवड़िया कॉलोनी के पास विश्व की सबसे विराट सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा- ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ राष्ट्र को समर्पित की। इस अवसर पर मोदी ने इतिहास के स्वर्ण पृष्ठ को उजागर करते हुए कहा कि भविष्य की पीढ़ी को एकता-अखंडता की प्रेरणा मिलती रहे इसके लिए भारत ने यह गगनचुंबी आधार तैयार किया है। सरदार वल्लभभाई पटेल की यह प्रतिमा सरदार के प्रण, प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का जीता-जागता प्रगटीकरण है। राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण और भारत भक्ति की ताकत से मन में मिशन के साथ गुजरात में यह काम ऐतिहासिक समय में पूर्ण किया है। यह स्मारक करोड़ों भारतीयों के सम्मान और सैकड़ों देशवासियों के सामर्थ्य का प्रतीक है। स्टेच्यू ऑफ यूनिटी देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार निर्माण के लिए महत्वपूर्ण स्थल साबित होगा। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र के हजारों आदिवासियों के जनजीवन को बेहतर बनाकर परिवर्तन लाने वाला यह एकता का तीर्थस्थल बनेगा।

प्रधानमंत्री ने मुख्य मंच से लीवर द्वारा वर्चुअली राष्ट्रार्पण की विधि संपन्न की। उन्होंने कहा कि भारत भक्ति की भावना के बल पर ही हजारों वर्षों से भारत की सभ्यता विकसित हो रही है। देश में जब-जब ऐसे अवसर आए हैं तब पूर्णता का अहसास होता है। आज ऐसा ऐतिहासिक क्षण आया है, जिसे मिटाना मुश्किल है। भारत राष्ट्र के इतिहास में यह अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण हमेशा के लिए अंकित हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के लोकार्पण अवसर पर तमाम गुजरातियों, भारतवासियों और हिन्दुस्तान को प्रेम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को शुभकामनाएं दी। भारत की एकता के लिए समर्पित विराट व्यक्तित्व को स्वतंत्रता से अब तक उचित स्थान नहीं मिला है इसलिए निरंतर अधुरेपन का अहसास हुआ करता था। इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि आज सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे विराट व्यक्तित्व को उचित स्थान प्रदान कर इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ को उजागर करने का कार्य हुआ है। आज धरती से लेकर आसमान तक सरदार पटेल पर अभिषेक हो रहा है। विश्व की विराटतम प्रतिमा का निर्माण करके भारत ने इतिहास बनाया है। आने वाली पीढ़ियां इससे प्रेरणा हासिल करती रहेगी।

सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा राष्ट्र को अर्पित करने का अवसर मिलने पर स्वयं को सौभाग्यशाली बतलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब इस विराट प्रतिमा के निर्माण की परिकल्पना उन्होंने की थी। उन्होंने कहा कि तब उन्हें अहसास नहीं था कि प्रधानमंत्री के रूप में इस प्रतिमा को राष्ट्र को अर्पित करने का अवसर उन्हें मिलेगा। उन्होंने कहा कि, इस ऐतिहासिक अवसर को मैं देश की कोटि-कोटि जनता का आशीर्वाद मानता हूं और धन्यता का अनुभव करता हूं। इसके लिए गुजरात की जनता का भी आभारी हूं। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा गुजरात की जनता की ओर से दिए गए अभिनंदन पत्र- सम्मान पत्र को आशीर्वाद के रूप में स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता अपने बच्चे की पीठ पर हाथ रखती है और उस बालक की ताकत, उत्साह और ऊर्जा हजारों गुना बढ़ जाती है, ठीक उसी तरह गुजरात की जनता द्वारा दिए गए सम्मान पत्र में मैं उस आशीर्वाद की अनुभूति कर रहा हूं। सरदार वल्लभभाई पटेल की यह प्रतिमा उनके साहस, सामर्थ्य और अखंड भारत के संकल्प की याद दिलवाती रहेगी। देश के लाखों गांवों के करोड़ों किसान परिवारों ने इस प्रतिमा के निर्माण को जन आंदोलन बनाया है। सैकड़ों मीट्रिक टन लोहा किसानों ने दिया है जो इस प्रतिमा की नींव में मौजूद है।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की ओर से प्रधानमंत्री को स्मृति भेंट के रूप में लोहा अभियान के अंतर्गत झारखंड के किसान की ओर से दिया गया लोहे का हथोड़ा और अभियान के आरंभ के समय उन्हें मिला फ्लेग प्रदान किया गया। इन चीजों को स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के म्यूजियम में ही रखने का प्रधानमंत्री ने अनुरोध किया। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के भविष्य को लेकर दुनिया में व्याप्त चिंता को दूर कर दिया था। इसके लिए सरदार को शत-शत नमन करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत के 550 से ज्यादा रजवाड़ों के कारण समग्र दुनिया में भारत के भविष्य को लेकर घोर निराशा थी। निराशावादी उस युग में भी हुआ करते थे। लोगों को लगता था कि विविधताओं के कारण भारत बिखर जाएगा। लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल में चाणक्य जैसी कूटनीति और शिवाजी महाराज के शौर्य का समन्वय था।

8 जुलाई, 1947 को वल्लभभाई पटेल द्वारा दिए गए वक्तव्य का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके आह्वान पर सैकड़ों राजा एक हो गए और भारत एक हो गया। राजा-रजवाड़ों के त्याग और बलिदान को भी निरंतर स्मृति में रखते हुए उन्होंने स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के पास ५५० रजवाड़ों के विलीनीकरण की याद करवाता हुआ म्यूजियम बनवाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राजाओं ने अपने पूर्वजों की अमूल्य धरोहर इस देश को समर्पित कर दी थी और हम उनके इस समर्पण को कभी भुला नहीं सकते। आलोचनाओं को ताकत बनाकर सरदार वल्लभभाई पटेल ने हमेशा देश को राह दिखलाई है। इसका स्मरण करते हुए मोदी ने कहा कि आज भारत पूरी दुनिया के साथ अपनी शर्तों पर संवाद स्थापित कर रहा है। दुनिया की आर्थिक और सामाजिक शक्ति बनने की ओर भारत प्रयाण कर रहा है। इस ताकत के पीछे एक साधारण किसान के परिवार में जन्मे असाधारण सरदार वल्लभभाई पटेल की बड़ी भूमिका रही है।

मोदी ने कहा कि कच्छ से कोहिमा और कारगिल से कन्याकुमारी तक हम आज बेरोकटोक आ-जा सकते हैं तो यह सरदार पटेल के संकल्प से ही संभव हुआ है। अगर उन्होंने संकल्प न लिया होता तो आज गिर के सिंह देखने, शिवभक्तों को सोमनाथ महादेव के दर्शन करने और हैदराबाद का चारमीनार देखने के लिए भारतीयों को वीजा लेना पड़ता। कश्मीर से कन्याकुमारी तक की ट्रेन की भी कल्पना नहीं हो सकी होती। इंडियन सिविल सर्विस में कहीं इंडियन, कहीं सिविल या कोई सर्विस है ही नहीं, ऐसा वक्तव्य सरदार पटेल ने 21 अप्रैल, 1947 में दिया था।

इसका उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने उस वक्त देश के युवाओं से स्थिति बदलने का आह्वान किया था। भारतीय प्रशासनिक सेवा का गौरव बढ़ाने में, उसके नवनिर्माण में और पारदर्शिता के साथ ईमानदारी पूर्वक प्रशासनिक सेवा प्रस्थापित करने में पटेल का बड़ा योगदान था। वह सामान्य नागरिकों को लोकतंत्र के साथ जोड़ने के कार्य में निरंतर समर्पित रहे। भारत की राजनीति में महिलाओं के सक्रिय योगदान के लिए बड़ा श्रेय सरदार को ही जाता है।

यह प्रतिमा सिर्फ विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ही नहीं है बल्कि वैश्विक प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का जीता-जागता उदाहरण है। इसका उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रतिमा देश के सपूतों के सामर्थ्य और समर्पण का सम्मान है। नूतन भारत के निर्माण के लिए नूतन आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति का आलेख है। आजादी के समय भारत के अस्तित्व पर सवाल खड़े करने वाले लोगों को सरदार पटेल ने देश की एकता और अखंडता के मंत्र द्वारा जवाब दिया था। स्टेच्यू ऑफ यूनिटी भारत शाश्वत है और शाश्वत रहेगा, यह संदेश निराशावादी लोगों को देगा। इस अवसर पर प्रतिमा निर्माण में देश भर के गांवों से लाई गई खेतों की मिट्टी और किसानों द्वारा उपयोग किए गए औजारों के योगदान का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की भावना इस प्रतिमा की आत्मा है। देश के विकास में आदिवासी बंधुओं की कर्मगाथा को प्रस्तुत करती यह शाश्वत प्रतिकृति है।

प्रधानमंत्री ने नया भारत के निर्माण में युवाओं और आने वाली पीढ़ी के योगदान को महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि विश्व की सबसे विराट यह प्रतिमा निडरता, पारदर्शिता और प्रामाणिकता का संदेश तो देगी ही, साथ ही इसकी वैश्विक ऊंचाई भविष्य के श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए भी युवाओं को प्रेरणा देगी और एक भारत-श्रेष्ठ भारत का हमारा संकल्प साकार होगा। यह समग्र स्मारक इंजीनियरिंग तकनीक के सामर्थ्य का प्रतीक है। करीब 90 वर्ष की आयु पर पहुंचे देश के गणमान्य शिल्पकार पद्मश्री राम सुथार के नेतृत्व में रोजाना ढाई हजार से ज्यादा कारीगरों और इंजीनियरों के कर्मयज्ञ से यह भगीरथी कार्य पूर्ण हुआ है। मन में मिशन की भावना, राष्ट्रीय एकता, समर्पण और भारत भक्ति के बल के बगैर यह संभव नहीं था। इस कार्य में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिमा के निर्माण कार्य में शामिल सभी लोग इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समग्र देश को एकता और अखंडता के सूत्र में बांधने वाले सरदार पटेल को ऐसा सम्मान मिलना ही चाहिए जिसके वह हकदार हैं और 31 अक्टूबर, 2010 को स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण का विचार उन्हें आया था जो आज साकार हुआ है। स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का यह स्थल रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिए प्रेरक बल बनेगा। इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार इस परिसर को पर्यटन के उद्देश्य से विकसित कर रही है जिसके चलते इस क्षेत्र के हजारों आदिवासियों युवाओं को सीधा रोजगार प्राप्त होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि एकता के प्रतीक समान इस परिसर में एकता नर्सरी बने, जहां से एकता के संदेश के साथ एक पौधा प्रत्येक आगंतुक अपने साथ ले जाए और घर में उसे लगाकर एकता की भावना को सुदृढ़ करे। पर्यटन के कारण आदिवासी संस्कृति से पर्यटक परिचित होंगे, इसके साथ ही चावल के आटे से तैयार होने वाले आदिवासी परंपरागत व्यंजन, उनामांडा, तोहालामांडा और थोकालामांडा का स्वाद भी पर्यटकों को यहां प्राप्त होगा। यह स्थल आदिवासी संस्कृति का संशोधन केंद्र बने, यह भावना उन्होंने व्यक्त की।

भारत सरकार संस्कृति और संस्कार को लेकर आगे बढ़ रही है। इसलिए ही हमने सपूतों के कर्तव्य को स्मारक के साथ जोड़ा है। दिल्ली में आधुनिक म्यूजियम हो, गांधीनगर में महात्मा मंदिर और दांडी कुटीर, डॉ. अंबेडकर पंचतीर्थ स्मारक हो या हरियाणा में छोटुराम की प्रतिमा, महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज की विराट प्रतिमा हो, कच्छ के मांडवी में गुजरात के सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा का स्मारक हो या फिर गुजरात के आदिवासी गोविंद गुरु का स्मारक हो- भावी पीढ़ी के लिए यह सब प्रेरणा स्थल बनेंगे। ऐसे कार्यों को इतिहास को पुनर्जीवित करने वाला बतलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सपूतों को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने के इस कार्य को भी कई लोग राजनैतिक चश्मे से देखते हैं और इस तरह का व्यवहार करते हैं जैसे उन्होंने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो। ऐसे लोगों को करारा जवाब देते हुए श्री मोदी ने कहा कि क्या देश के महापुरुषों का स्मरण करना कोई अपराध है? प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल के ग्रामोद्धार की भावना और ग्रामोन्नति की सहकारिता प्रवृत्ति को प्रेरित करने की कुशलता का उल्लेख करते हुए युवाओं का आह्वान किया। एक भारत-श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए सरदार साहेब ने जो स्वप्न देखा था, उसे साकार करने के लिए देश के प्रत्येक युवा को आगे आना चाहिए।

सशक्त, सुदृढ़, संवेदनशील, सतर्क और समावेशी भारत का निर्माण करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने गांव-गांव में बिजली, पानी, सड़क और शौचालय से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाई है। स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए आयुष्मान भारत अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री जन स्वास्थ्य योजना लागू की है। ऐसे अनेक कार्यों द्वारा सर्वसमावेशी और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का मंत्र सबका साथ, सबका विकास है। श्रेष्ठ भारत का निर्माण और भारत जोड़ो अभियान के अंतर्गत वन नेशन-वन टैक्स के संकल्प द्वारा जीएसटी का अमल, ई-नाम योजना द्वारा देश के खेतों की उपज के बाजारों को जोड़ना, वन नेशन-वन ग्रिड द्वारा बिजली क्षेत्र में स्वावलंबन की दिशा में प्रयास, सेतु भारतम जैसे प्रकल्प द्वारा सरकार ने जन आंदोलन शुरू किया है।

सभी का आह्वान करते हुए उन्होंने सरदार पटेल के शब्दों- ‘प्रत्येक भारतीय को भूलना पड़ेगा कि वह किस जात-पात अथवा वर्ग का है। एक ही बात याद रखनी पड़ेगी कि वह भारतीय है।’ को दोहराया। सरदार पटेल की यह भावना प्रत्येक नागरिक के हृदय में अवश्य जागरूक होगी, ऐसी उम्मीद व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विराट प्रतिमा विश्व के लिए एकता तीर्थ बनेगी।