शहीद दिवस पर भगत, राजगुरु व सुखदेव की शहादत का स्मरण कर दी श्रद्धांजलि


आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले शहीद भगत, राजगुरु व सुखदेव की शहादत का स्मरण कर उन्हें पूरे देश में उनका नमन किया गया।
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जौनपुर। आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले शहीद भगत, राजगुरु व सुखदेव की शहादत का स्मरण कर उन्हें पूरे देश में उनका नमन किया गया। उत्तर प्रदेश में जौनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित क्रांति स्तंभ पर शनिवार को हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी तथा लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने देश के महान क्रांतिकारी एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनके 88 वां शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने क्रांति स्तंभ पर मोमबत्ती व अगरबत्ती जला कर तीनों महान क्रान्तिकारियों को दो मिनट का मौन रखकर अपनी श्रंद्धाजलि दी। क्रांति स्तंभ पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि देश के महान क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले के बग्गा गांव निवासी सरदार किशन सिंह के यहां हुआ था। देश की आजादी की लड़ाई में इन्होंने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।

उन्होंने कहा कि भगत सिंह का मानना था कि क्रान्ति का मतलब बम और पिस्तौल की संतुष्टि नहीं है। वे कहते थे कि पिस्तौल और बम इंकलाब नहीं लाते, इंकलाब की तलवार तो विचारों की शान पर तेज होती है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत कि नींव हिला देने वाले भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फांसी पर लटका दिया। मंजीत कौर ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक भगत सिंह को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि वे भगत सिंह को शहीद का दर्जा प्रदान करें, ताकि लोग उन्हें शहीद-ए-आजम कह सकें। इस अवसर पर धरम सिंह, अजय सिंह, सुरेखा पाल, अनिरुद्ध सिंह, मंजीत कौर, मैनेजर पांडेय सहित अनेक लोग मौजूद थे।

– ईएमएस