मोदी विरोध के चक्कर में देश का नुकसान क्यों करते हो!


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– पांच वर्षों की मेहनत और परिश्रम से हमने देश की नींव मजबूत की है, इसी पर भारत की भव्य इमारत बनेगी

नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ लोगों द्वारा अपने ही देश का विरोध करने को राष्ट्र के समक्ष चुनौती बताते हुए कहा कि मोदी विरोध की जिद में देश हित का विरोध मत करिए। ध्यान रखिए कि मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकियों को, आतंक के सरपरस्तों को सहारा न मिल पाये। देश में आज एक चुनौती है कि कुछ लोगों द्वारा अपने ही देश का विरोध किया जा रहा है। आज जब पूरा देश सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है तो कुछ लोग सेना पर ही संदेह कर रहे हैं। उन्होंने कहा ‎कि ऐसे लोगों से मैं कहना चाहता हूं कि आपको सेना के सामर्थ्य पर संदेह है या भरोसा है। मोदी विरोध करना हो तो जरूर करिए, हमारी योजनाओं में कमियां निकालिए। आपका हमेशा स्वागत है। लेकिन देश के सुरक्षा हितों का, देश के हित का विरोध मत करिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां पूरा विश्व आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के पीछे खड़ा था वहीं देश के कुछ दल इस पर प्रश्न उठा रहे थे। राफेल विमान सौदे पर विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा ‎कि राफेल पर स्वार्थनीति और अब राजनीति के कारण देश का बहुत नुकसान हुआ। राफेल की कमी आज देश ने महसूस की है। आज हिंदुस्तान एक स्वर में कह रहा है कि अगर हमारे पास राफेल होता, तो क्या होता? प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से 2019 तक आवश्यकताओं को पूरा करने का समय था, जबकि 2019 से आगे आकांक्षाओं को पूरा करने का अवसर है। बीते पांच वर्षों की मेहनत और परिश्रम से हमने देश की नींव को मजबूत करने का काम किया है। इसी नींव पर नए भारत की भव्य इमारत का निर्माण होगा। आज मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि हां इक्कीसवीं सदी भारत की होगी। उन्होंने कहा कि देश में कई मोदी आएंगे और जाएंगे, लेकिन यह देश अजर और अमर रहेगा।

मोदी ने कहा कि 2014 के चुनाव के बाद जब वह दिल्ली आये थे तो बहुत सी बातों का अनुभव उन्हें नहीं था और यही वरदान साबित हुआ। मोदी ने कहा कि आज का भारत नया भारत है। हमारे लिए एक-एक वीर जवान का खून अनमोल है। अब कोई भी भारत को आंख दिखाने का प्रयास नहीं कर सकता। आज का भारत निर्भीक है, निडर है और निर्णायक है। सवा सौ करोड़ भारतीयों के पुरुषार्थ के कारण ही देश आज आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आतंक के आकाओं में सैनिकों के शौर्य का डर हो तो ये अच्छा है। जब भ्रष्टाचारियों में भी कानून का डर हो तो ये डर अच्छा है। अब ये नया भारत अपने सामर्थ्य, अपने साधन, अपने संसाधनों पर भरोसा करते हुए आगे बढ़ रहा है।